जम्मू। रेलवे स्टेशन के निकट मंगल मार्केट और वैष्णवी धाम के पीछे जम्मू विकास प्राधिकरण (जेडीए) की चार कनाल बेशकीमती सरकारी जमीन पर 30 कब्जों को पुलिस की मौजूदगी में हटा दिया गया। करीब डेढ़ दशक बाद भूमि को कब्जे में लिया गया। कोर्ट के आदेश पर जेडीए के डायरेक्टर लैंड मैनेजमेंट गरबी राशिद की अध्यक्षता में टीम की शुरुआती कार्रवाई का अतिक्रमणकारियों ने विरोध किया। पुलिस ने उन्हें मौके से खदेड़ दिया। इसके बाद जेसीबी की मदद से खोखे और ढाबों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई।
बुधवार सुबह पांच बजे जेडीए की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची तो हड़कंप मच गया। अतिक्रमणकारियों ने विरोध जताने की कोशिश की लेकिन पुलिस के आगे किसी की नहीं चली। मंगल मार्केट में बने खोखों और ढाबों को लेकर लंबे समय से कोर्ट में विवाद चल रहा था। कोर्ट में जेडीए की जमीन को अपना बताते हुए दो व्यक्तियों ने अनधिकृत रूप से कब्जा कर रखा था। कब्जाधारियों ने कब्जे को वैध कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। अदालत के निर्देश के बाद जब सक्षम प्राधिकारी ने जांच की तो देखा कि यह कब्जा अवैध है और जमीन जेडीए की है।
कोर्ट के निर्देश पर अवैध निर्माण को गिराने का फैसला लिया गया। कार्रवाई से पहले वाइस चेयरमैन ने डीसी और एसपी से संपर्क करके पुलिस की मांग की। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कार्रवाई के एक दिन पहले बैठक में तय हुआ कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सूर्य उदय से पहले करना ठीक होगा, क्योंकि दिन निकलने के बाद अगर कार्रवाई होती है तो विरोध करने वालों की संख्या अधिक हो सकती थी। योजना के अनुसार टीम जेसीबी व कर्मचारियों के साथ मंगल मार्केट और वैष्णवी धाम के पीछे पहुंची और अवैध कब्जों को उखाड़ फेंका।
छिन गया रोजगार
मंगल मार्केट और वैष्णवी धाम मुख्य सड़क के किनारे खोखे बनाकर कारोबार कर रहे लोगों ने मांग की कि नुकसान को देखते हुए पुनर्वास के लिए प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था कराए। उन का कहना है कि वे सालों से यहां आजीविका चला रहे थे, अचानक कार्रवाई होने से रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कोर्ट के दांव-पेंच में उलझा था मामला
अतिक्रमणकारियों का बड़ा हथियार कानूनी दांव पेंच था। जेडीए जब भी किसी अवैध निर्माण को गिराने की कोशिश करता है तो कब्जाधारी अदालत से स्टे ले आते थे। उचित पैरवी न होने के कारण मामले सालों-साल लटके रहे। इस बीच जमीन पर कब्जा और मजबूत होता गया। जेडीए का प्रवर्तन दस्ता भी मूकदर्शक है। जब निर्माण पूरी तरह पक्का हो जाता है या जमीन पर लोग बस जाते हैं तब विभाग कागजी नोटिस जारी करता है। सिद्दड़ा, बठिंडी, त्रिकुटा नगर, ग्रेटर कैलाश, रूप नगर, जानीपुर, कुंजवानी और नरवाल बाईपास में तो जेडीए के पास अपनी ही जमीन का स्पष्ट रिकॉर्ड या डिमार्केशन (सीमांकन) तक नहीं है। इसका फायदा भू माफिया उठा रहे हैं।
सरकारी जमीन सार्वजनिक धरोहर है और इसकी रक्षा करना प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। आम जनता से अपील की है कि वे सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने से बचें और सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
- डॉ. रूपेश कुमार, वाइस चेयरमैन, जेडीए।