जीएमसी की इमरजेंसी में पिछले चार दिन में तीमारदारों और डाक्टरों की झड़प में तीमारदारों के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इसमें जूनियर डाक्टर तीन बार कामकाज ठप कर चुके हैं।
शनिवार की रात अभी एक मामला सुलझा ही था कि देर रात 12:30 बजे के करीब इमरजेंसी के रूम नंबर चार में कासिम नगर से मरीज के साथ आए तीमारदारों और डाक्टरों के बीच विवाद हो गया, जिससे जूनियर डाक्टर फिर भड़क गए और एक घंटा कामकाज ठप रखा।
इस मामले में भी बख्शीनगर थाने में एफआईआर होने पर ही डाक्टर काम पर लौटे। जीएमसी की इमरजेंसी में सुरक्षा चुनौती बन गई है। अस्पताल की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए एक्स सर्विसमैन को तैनात करने की तैयारी की जा रही है। सोमवार को डाक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों की अहम बैठक में सुरक्षा का खाका तैयार किया जाएगा।
गत सोमवार को तीमारदार के अभद्र व्यवहार को लेकर डाक्टरों ने तीन दिन कामकाज ठप रखा था। जीएमसी की इमरजेंसी में आए दिन तीमारदारों और डाक्टरों में झड़प की घटनाएं अधिकारियों के लिए भी सिरदर्द बनती जा रही हैं।
जीएमसी की बात करें तो यहां सुरक्षा में लगातार कटौती होती रही है। मई 2013 में जीएमसी में स्टाफ और चिकित्सा कर्मियों में मारपीट और कहासुनी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए 88 एसपीओ को तैनात किया गया था, लेकिन कुछ समय पहले यह जिम्मेदारी फिर निजी हाथों में दे दी गई।
इसमें आधे ही करीब चालीस निजी सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं, जबकि वर्ष 2013 मई से पहले 137 निजी सुरक्षाकर्मी तैनात थे। ताजा मामलों को देखते हुए सुरक्षा को मजबूत बनाने को गंभीरता से लिया जा रहा है।
इसमें एक्स सर्विसमैन के अलावा राज्य पुलिस के जवानों को तैनात किया जा सकता है। मौजूदा समय में इमरजेंसी में निजी सुरक्षाकर्मियों के अलावा राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के कुछ जवान तैनात हैं।