रियासत में 250 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की खरीद से बात बनती नहीं दिख रही है। विशेषज्ञों की माने तो गर्मी में जिस रफ्तार से बिजली की मांग बढ़ रही है और उपलब्धता को देखते हुए करीब 900 मेगावाट का अंतर फिर भी रहेगा और इससे ओवरलोड से लेकर अघोषित कटौती से गर्मी के सीजन में राहत मिलती नहीं दिख रही है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रियासत में बिजली की मांग 2700 मेगावाट के पार पहुंच चुकी है। जबकि रियासत के अपने उत्पादन के अलावा बिजली खरीदकर कर भी 1500 से 1600 मेगावाट तक की ही उपलब्धता हो पा रही है। अगर 250 मेगावाट अतिरिक्त बिजली खरीद भी ली जाए तो 1750 मेगावाट के करीब बिजली की उपलब्धता रहेगी।
इससे 850 से लेकर 900 मेगावाट तक का शार्टफाल रहेगा जिससे गर्मी के मौसम में अघोषित कटौती से लेकर संकट जैसे हालत रहेंगे। खासतौर पर जरूरी घंटों जिसमें सुबह और शाम व रात को सोने के समय बिजली ढांचे पर ओवरलोड बढ़ने पर कटौती लोगों को परेशान करेगी।
बिजली विभाग के अधिकारियों ने नाम न छापने की तर्ज पर बताया कि बिजली की किल्लत की वजह से ढांचे पर ओवरलोड बढ़ने पर कटौती के अलावा ओर कोई विकल्प नहीं रहता। रियासत में बिजली की बर्बादी खासतौर से ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन लासिस से बिजली की बर्बादी और चोरी पर लगाम नहीं लग पाई है।
इस वजह से करीब आधी बिजली बर्बादी हो जाती हैं। बिजली ढांचे को मजबूत करने की परियोजनाएं जिसमें आरएपीडीआरपी पर काम भी अधर में लटका पड़ा है। इस वजह से कमजोर ढांचा बिजली का ओवरलोड नहीं उठा पाता और उपभोक्ताओं को बिजली कटौती की मार सहनी पड़ती है।