श्रीनगर स्थित नेशनल कांफ्रेंस के संरक्षक डा. फारूक अब्दुल्ला के घर शुक्रवार को जर्मन दूतावास माइकल स्टेनिर अपनी पत्नी एलिएसे स्टेनिर के साथ उनसे मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कई ऐसे मुद्दों पर चर्चा की जिससे भारत और जर्मनी के लोगों के बीच आपसी सहयोग और सहमति को बढ़ावा मिल सके। जर्मन दूतावास ने दोनों देशों के लोगों के बीच के सहयोग और आपसी सहमति वाले रिश्तों पर रोशनी डाली।
साथ ही ऐसे रिश्तों की जरूरत पर जोर डालते हुए कहा कि इन्हीं के कारण दोनों देशों के बीच बहुमुखी संबंध बने रहेंगे। इसके अलावा जर्मन दूतावास ने जम्मू कश्मीर राज्य के पर्यटन पर कहा कि वह आज तक जहां भी घूमे हैं, इससे अच्छी जगह नहीं देखी। डा. फारूक अब्दुल्ला ने राज्य के लोगों के प्रति जर्मन दूतावास के लगाव का स्वागत किया।
उन्होंने दोनों देशों के छात्रों के महत्व को लेकर भी बात की जो एक दूसरे की भाषाओं के साथ-साथ इतिहास और संस्कृति भी पढ़ रहे हैं। डा. अब्दुल्ला ने दोनों देशों के उन क्षेत्रों पर भी रोशनी डाली, जिनमें वह एक दूसरे को फायदा पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को पर्यटन, ग्रामीण विकास और सॉलिड बेस्ड मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में जर्मनी की टेक्नोलॉजी से लाभ हो सकता है।
इस मौके पर जर्मन दूतावास और उनकी पत्नी को डा. अब्दुल्ला द्वारा कश्मीरी हस्तकला की पारंपरिक वस्तुएं यादगार के तौर पर भेंट की गई।