2 जनवरी, आज ही के दिन जम्मू के रेलवे स्टेशन पर हजारों यात्रियों की जान बचाने लेफ्टिनेंट त्रिवेणी सिंह ने दस साल पहले शहादत का जाम पिया था। 2 जनवरी, 2004 को जम्मू रेलवे स्टेशन पर आतंकी हमला हुआ था, इसमें भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट ने शहादत पाने से पहले दोनों आतंकियों को मार गिराया था।
आज उनकी शहादत को याद किया जाएगा। उनकी बहादुरी कि किस्से आज भी सबके जेहन में है। मरने से पहले त्रिवेणी सिंह ने अपने जीओसी से कहा कि सर आपरेशन पूरा हो गया है, अब उनको इजाजत रुखसत कीजिए। उनकी इस शहादत के लिए अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
आज ही के दिन दस साल पहले हथियारों से लैस दो आतंकियों ने जम्मू के रेलवे स्टेशन पर हमला कर दिया था। इनको मार गिराया था डोगरा रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट त्रिवेणी सिंह ने। 1 फरवरी, 1978 को झारखंड के नमकुम में जन्मे त्रिवेणी सिंह की वीरता सेना का सर ऊंचा कर देती है।
300 लोगों की जान बचाने के लिए खुद की जान दे दी
त्रिवेणी के माता पिता ने परिवार का अकेला पुत्र होने के बावजूद उसे मार्शल आर्ट, जूडो कराटे सिखाए। तब त्रिवेणी सिंह 15 साल के थे। राष्ट्रीय स्तर के मार्शल आर्ट प्रतियोगिता में उन्हें गोल्ड मेडल मिला। इसके बाद उन्होंने एनडीए का टेस्ट पास किया और सेना में भर्ती हो गए। कृषि स्नातक होने के बावजूद सेना में भर्ती हुए। दिसंबर 8, 2001 में वह सेना में भर्ती हुए।
2003, 31 दिसंबर को त्रिवेणी सिंह ने पठान कोट में आर्मी क्लब में अपने परिवार के साथ जमकर मौज मस्ती की, लेकिन उसे कहां पता था कि ठीक एक दिन बाद उसका मौत से सामना हो जाएगा। 2 जनवरी, 2004 को त्रिवेणी सिंह टीवी देख रहे थे, तभी उन्हें जम्मू के रेलवे स्टेशन पर फिदायीन हमला होने की सूचना मिली।
वह तुरंत अपने पांच कमांडों के लेकर स्टेशन पर पहुंच गए और एक आतंकी को मार गिराया। जबकि दूसरा प्लेटफार्म के फुट ओवर ब्रिज के नीचे छुपकर लगातार फायर कर रहा था। त्रिवेणी सिंह को पता चल गया कि यदि वह रेल ब्रिज से बाहर निकल गया तो 300 लोगों की जान चली जाएगी। इसलिए वह उसके सामने चला गया और उसे मार गिराया। लेकिन इस दौरान खुद भी बुरी तरह से घायल हो गया। इस दौरान उनकी मौत हो गई।