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अटल बिहारी वाजपेयी ने 1980 में पुंछ में लोगों को दिया था आश्वासन, हम पीओके को भी छीन लेंगे

Fri, 17 Aug 2018 10:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जम्मू-कश्मीर के लोगों से अगाध प्रेम था। 1980 में पुंछ दौरे के दौरान जब वह यहां पहुंचे तो रात के 12 बजे रहे थे परंतु उन्हें सुनने के लिए हजारों लोग उस समय भी मौजूद थे। वाजपेयी को अपने बीच पाकर लोगों ने उन्हें घेर लिया और अपनी आशंका प्रकट की क्या पुंछ का जो हिस्सा भारत में है उसे भी पाकिस्तान ले लेगा। 
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इस पर वाजपेयी ने आश्वस्त किया था कि यह हिस्सा तो कहीं नहीं जाने वाला बल्कि हम उस हिस्से को भी छीन लेंगे जो पाकिस्तान के कब्जे में है। बाद में 22 फरवरी 1994 में संसद के दोनों सदनों ने एक प्रस्ताव पारित कर पीओके को भारत का अभिन्न अंग बताया। यह वाकया बयान करते-करते भारतीय जनता पार्टी के सबसे पुराने नेता और पेशे से वकील बख्शी द्वारकानाथ दत्ता की आंखे भर आईं। 

उन्होंने बताया कि अटल का पुंछ प्रेम ही आगे चल कर नियंत्रण रेखा के आस-पार के बिछुड़े लोगों को मिलवाने के लिए पुंछ के चक्कां दा बाग की राह-ए-मिलन स्थापित करने का आधार बना।
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10 हजार कार्यकर्ता रात 12 बजे तक कर रहे थे इंतजार
पुरानी यादें ताजा करते हुए दत्ता आगे कहते हैं जब अटल पुंछ आए तो उनको सुनने के लिए नगर में दस हजार के करीब लोग जुटे हुए थे। तब जम्मू से पुंछ के बीच छोटी गाड़ी से भी 10 घंटे का समय लगता था, ऐसे में उनको पुंछ पहुंचने में देरी हो गई। कलाई पुल के पास कुछ कार्यकर्ता रास्ता बताने के लिए खड़े किए गए थे, लेकिन अंधेरा होने के चलते उन्हें वाजपेयी जी की गाड़ी नहीं दिखी और वे जलास पहुंच गए। वहां से रास्ता पूछते हुए वे रात करीब 12 बजे पुंछ पहुंचे, तब भी लोग उन्हें सुनने के लिए डटे हुए थे। उनका भाषण सुनने के बाद ही लोग घरों को गए।

कांग्रेसी नेता ने भाषण के लिए दिया था साउंड सिस्टम
द्वारकानाथ दत्ता ने बताया कि अटल की शख्सियत ऐसी थी कि हर कोई उनसे प्रेम करता था। जब वे पुंछ आए तो यहां पर तब माइक सिस्टम किराये पर नहीं मिलता था। उस समय यहां के कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मंत्री गुलाम मोहम्मद मीर पुंछी ने अपना निजी साउंड सिस्टम दिया, जिसके बाद लोग अटल का भाषण सुन पाए। मीर ने माइक देते हुए कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे नेता के लिए माइक तो क्या अपनी जान भी दे सकता हूं। 

संसद में पारित हुआ था यह प्रस्ताव
-पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। भारत अपने इस भाग के विलय का हर संभव प्रयास करेगा।
-भारत में इस बात की पर्याप्त क्षमता और संकल्प है कि वह उन नापाक इरादों का मुंहतोड़ जवाब दे जो देश की एकता, प्रभुसत्ता और क्षेत्रिय अंखडता के खिलाफ हों।
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-पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के उन इलाकों को खाली करे जिसे उसने कब्जाया हुआ है।
-भारत के आतंरिक मामलों में किसी भी हस्तक्षेप का कठोर जवाब दिया जाएगा।
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