तमाम कोशिशों के बावजूद नेशनल हाईवे पर आतंकी हमले रोक पाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किल हो रहा है। यूं कह लें कि सुरक्षा एजेंसियां हाईवे पर हमलों को रोकने का तोड़ नहीं निकाल पाईं। पुख्ता सुरक्षा बंदोबस्त होने के बावजूद पिछले पांच साल में हाईवे पर 50 से अधिक आतंकी हमले हो चुके हैं। इनमें सबसे बड़ा हमला पुलवामा में हुआ।
पठानकोट से लेकर श्रीनगर तक आतंकियों का जाल फैला है। जो हर छह महीने में किसी न किसी जगह हमले को अंजाम दे जाते हैं। पांच साल के दौरान कठुआ के राजबाग पुलिस स्टेशन पर, सांबा में सैन्य कैंप पर, पठानकोट एयरबेस पर, नगरोटा के सैन्य कैंप पर, उधमपुर के पास, अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों पर, श्रीनगर से पांपोर तक के 22 किलोमीटर के दायरे में करीब दो दर्जन हमले हो चुके हैं।
अब भी लगातार हमलों का सिलसिला जारी है। हाईवे पर गश्त भी काम नहीं कर पा रही। राज्य पुलिस की तरफ से हाईवे के खतरनाक स्ट्रेच को चिह्नित करने के लिए कहा गया था, लेकिन वह भी काम पूरा नहीं हो सका।
'सभी सुरक्षा एजेंसियां अपने स्तर पर सुरक्षा पुख्ता करने पर काम कर रही हैं। सभी तरह के पैरामीटर अपनाए जा रहे हैं। सभी एजेंसियां अपने स्तर पर अच्छा कर रही हैं। जहां कमी है, उसे दूर करने की कोशिश हो रही है।'- दिलबाग सिंह, डीजीपी