जम्मू। कश्मीर की हसीन वादियां एक बार फिर 70एमएम के पर्दे पर नुमायां होने लगी हैं। बालीवुड के प्रोड्यूसरों, डायरेक्टरों का दिल एक बार फिर कश्मीर के लिए धड़कने लगा है। हालिया रिलीज ‘हामिद’ हो या फिर सलमान खान निर्मित ‘नोटबुक’ दोनों में ही वादी की खूबसूरती झलकी है। शूटिंग के लिए एक बार फिर फिल्मकारों के कश्मीर का रुख करने से स्थानीय लोग भी उत्साहित हैं।
एक वक्त था जब ‘कश्मीर की कली’, ‘जब-जब फूल खिले’ जैसी फिल्मों का जादू सिने दर्शकों के सिर चढ़कर बोला। लेकिन 90 के दशक में आतंकवाद के साये ने फिल्मकारों के कदमों को ठिठका दिया। उन्होंने कश्मीर की जगह दूसरे पहाड़ी राज्याें को शूटिंग के लिए तरजीह देना शुरू कर दिया। विधु विनोद चोपड़ा ने अपनी फिल्म ‘मिशन कश्मीर’ के लिए थीम की जरूरत के मुताबिक कश्मीर को जरूर चुना, लेकिन ऐसा करने वालों की संख्या गिनी-चुनी रही। विधु विनोद चोपड़ा बीते साल एक बार फिर जम्मू-कश्मीर लौटे, कश्मीरी विस्थापितों पर एक प्रोजेक्ट को लेकर, अलबत्ता अभी तक उनका प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका है। इसके बावजूद कश्मीर के एक बार फिर पर्दे पर जीवंत होने से भविष्य के लिए उम्मीद तो जगती है।
‘देखिए, ‘मिशन कश्मीर’ वाली बोट, ये है चार चिनार...’
जम्मू। आप श्रीनगर में डल झील की सैर को शिकारे से निकलेंगे तो आपको शिकारे वाला आपको झील में खड़े बोट में से वह बोट जरूर दिखाएगा, जहां ‘मिशन कश्मीर’ की शूटिंग हुई। सैर के ही दौरान आपको ‘जब-जब फूल खिले’ के ‘परदेसियों से न अखियां मिलाना’ गीत की लोकेशन दिखाई जाएगी तो यह भी बताया जाएगा कि ‘अच्छा तो हम चलते हैं...’ गीत की शूटिंग चार चिनार में हुई थी। शिकारे वाले दानिश बताते हैं कि लोग इन फिल्मों के जरिये खुद को कश्मीर से जोड़ते हैं।
‘सिलसिला’ ट्यूलिप गार्डन और पहलगाम का
जम्मू। मेगा स्टार अमिताभ बच्चन और रेखा की बहु चर्चित फिल्म ‘सिलसिला’ के एक गीत की शूटिंग नीदरलैंड के ट्यूलिप गार्डन में हुई, लेकिन इसके कुछ हिस्से पहलगाम में भी फिल्माए गए हैं। श्रीनगर में भी एक ट्यूलिप गार्डन है, जिसके खुलने के दिन आने ही वाले हैं। पर्यटकों को इसके खुलने की तिथि का इंतजार है। हर साल यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।