उधमपुर। एक तरफ तो शिक्षा विभाग ग्रामीणों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकारी स्कूल में भेजने के लिए प्रेरित कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ इमारत तैयार करने के बाद भी सरकारी स्कूल शुरू नहीं कर पा रहा है। ऐसा ही एक मामला शिक्षा जोन घोरडी में है, जहां करीब आठ वर्ष पहले शिक्षा विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर प्राइमरी स्कूल करसैल की इमारत को तैयार किया, लेकिन आज तक सरकारी स्कूल में कक्षाएं आरंभ नहीं हो सकी हैं।
घोरडी ब्लाक की पंचायत सलगार में करीब आठ वर्ष पहले प्राइमरी स्कूल करसैल को मंजूरी मिली थी। मंजूरी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने इमारत का काम भी शुरू कर दिया। इमारत का काम शुरू होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली, क्योंकि उनके बच्चों को प्राइमरी कक्षा की शिक्षा के लिए तीन किलोमीटर दूर हाई स्कूल अप्पर थनोआ जाना पड़ता था। ग्रामीणों को लगा कि अब उनके बच्चे घर के पास ही प्राइमरी स्कूल में शिक्षा हासिल करेंगे। लेकिन इमारत बनने के बाद भी स्कूल नहीं खुला। ग्रामीणों को लगा कि हो सकता है कि किसी कारण इस वर्ष स्कूल नहीं खुला है और अगले वर्ष शिक्षा विभाग शिक्षक नियुक्त कर इसको खोल दे। लेकिन आठ वर्ष गुजरने के बाद भी शिक्षा विभाग स्कूल को खोलने में कामयाब नहीं हो पाया है।
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शिक्षा विभाग के पास नहीं है स्कूल में नियुक्त करने को शिक्षक
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कई बार ज्ञापन सौंप कर स्कूल खोलने की मांग को शिक्षा विभाग के सीईओ के सामने रखा है। सीईओ का कहना होता है कि उनके पास स्कूल में नियुक्त करने के लिए शिक्षक नहीं है। वहीं जब जिला प्रशासन के सामने मांग को रखते हैं तो प्रशासन के अधिकारियों का कहना होता है कि इसको लेकर प्रयास किए जांएगे।
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तीन किलोमीटर दूर स्कूल जाने को मजबूर नन्हें विद्यार्थी
बांके बिहारी, गोपाल, सुनील व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि इस स्कूल के आसपास करीब 100 ग्रामीण परिवार रहते हैं। इन परिवारों के पचास से अधिक बच्चे प्राइमरी शिक्षा के लिए तीन किलोमीटर दूर स्कूल में जाने को मजबूर हैं। यह स्कूल सभी के लिए एक उम्मीद की तरह है, लेकिन पता नहीं है कि कब यह स्कूल खुलेगा और यह उम्मीद पूरी होगी।
कुछ दिन पहले ही सीईओ का पद्भार संभाला है। उन्हें इस स्कूल के बारें में कोई जानकारी नहीं है। वह इसके बारे में पूरी जानकारी हासिल कर स्कूल को खुलवाने प्रयास करेंगे।
सीईओ तरसेम लाल