जिस फसल पर हजारों रुपये खर्च कर उसका छह महीने तक पकने का इंतजार किया, उसकी बर्बादी देखकर किसान सदमे में हैं। आलम यह है कि तबाह हुई फसलों को हटाने के लिए किसानों को अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। जिस फसल को किसान आग से बचाने का प्रयास करता है, उसमें अब खुद आग लगाकर खेत खाली कर रहा है।
किसानों के लिए पिछला एक साल मुसीबतों में गुजरा। किसानों को प्रति हेक्टेयर पर 14,400 रुपये की चपत लगी है। इसमें गेहूं बोने से लेकर काटने और हटाने तक का खर्च शामिल हैं। पूरे खर्च को बची फसल से जोड़ कर देखा जाए तो किसानों को प्रति हेक्टेयर तीन से चार हजार रुपये की पैदावार मिल रही है।
पूरी तरह नष्ट हो चुकी फसल का अगर थ्रैशिंग और कटाई का खर्च अलग कर दिया जाए, तो प्रति हेक्टेयर पर आठ हजार रुपये का खर्च झेलना पड़ा है। बची फसल की कटाई शुरू हो चुकी है। प्रति हेक्टेयर पर औसतन गेहूं की 15 क्विंटल पैदावार होती है। अच्छी फसल हो तो आंकड़ा 20 क्विंटल तक भी पहुंच जाता है।
इस समय प्रति हेक्टेयर पर दो से तीन क्विंटल पैदावार ही निकल रही है। जिसका किसानों को 2500 से 3000 रुपये ही मिल रहा है।
200 करोड़ का लग चुका चूना
जम्मू संभाग में ढाई लाख हेक्टेयर पर गेहूं की फसल लगाई गई थी। इसमें से डेढ़ लाख हेक्टेयर की फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। प्रति हेक्टेयर पर 14,400 रुपये के नुकसान को इस आंकड़े के साथ जोड़ कर देखा जाए तो 216 करोड़ रुपये की फसल तबाह हो चुकी है। सरकार ने अब तक कोई आंकड़ा नहीं बताया है।
परिवार की मेहनत पर फिरा पानी
हर किसान परिवार के औसत पांच सदस्यों ने गेहूं की फसल की छह महीने तक देखभाल की है। दो-चार दिन की बारिश ने ही छह महीने की मेहनत पर पानी फेर दिया। ऐसे ही एक किसान हैं चौधरी देवराज। आरएस पुरा राइस ग्रोअर्स एसोसिएशन के प्रधान देवराज का कहना है कि परिवार के छह सदस्य यदि कहीं और काम करते तो हजारों रुपये कमा सकते थे। गेहूं के पीछे मेहनत करने से सब कुछ लुट गया।
साफ कराने को 1600 रुपये अतिरिक्त खर्च
जिन किसानों की फसल खेतों में ही सड़ चुकी है। उन्हें अब प्रति हेक्टेयर 1600 रुपये देकर साफ करवाना पड़ रहा है ताकि अगली फसल के लिए भूमि तैयार की जा सके। इस 1600 रुपये को 14,400 रुपये खर्च जोड़ा जाए तो प्रति हेक्टेयर 16000 रुपये की चपत लगी है। पैसा नहीं होने से कई किसान फसल को आग लगा दे रहे हैं।
प्रति हेक्टेयर पर पर इतना होता खर्च
500 रुपये- एरो बुआई
1500 रुपये- ट्रैक्टर हल बुआई (दो बार)
1500 रुपये- डीएपी खाद
1000 रुपये- यूरिया खाद
300 रुपये- पोटाश
100 रुपये- चूहों से बचाने की दवाई
1000 रुपये- सिंचाई
1000 रुपये- बीज (56 किलो)
500 रुपये- लोडिंग अनलोडिंग
3500 रुपये- कटाई
3000 रुपये- थ्रैशिंग
500 रुपये- बीमारियों से बचाने को कीटनाशक
कुल 14400 रुपये- नतीजा सिफर