श्रीनगर। श्रीनगर जिले के डाउन टाउन इलाके का नाम सुनते ही एक आम इनसान के दिलो दिमाग में पत्थरबाजी और हिंसक प्रदर्शन का खयाल आता है। लेकिन वर्ल्ड ब्लड डोनर डे के अवसर पर एक ऐसी शख्सियत से मुलाकात हुई जो डाउन टाउन इलाके का रहने वाला है, लेकिन ऐसी नेकी की है कि उसे रियल लाइफ में हीरो माना जा सकता है। 57 वर्षीय शब्बीर हुसैन खान अपनी जिंदगी में अब तक 166 बारी रक्तदान कर चुके हैं।
शुक्रवार को श्रीनगर के रेड क्रॉस सोसाइटी के कार्यालय में दिनभर अपने वालंटियर्स की टीम के साथ मौजूद रहे शब्बीर सैकड़ों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वह हर तीन महीने के बाद नियमित रूप से दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए रक्तदान करते हैं। श्रीनगर के नौहट्टा इलाके के कमागारपोरा के रहने वाले शब्बीर हुसैन खान पेशे से पेपर माशी का काम करते हैं। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि उनके लिए रक्तदान से बढ़कर कोई नेक काम नहीं है। वह केवल मानवता की सेवा के उद्देश्य से रक्तदान करते हैं। खान ने बताया कि वह करीब 40 साल से हर तीन महीने के बाद रक्तदान करते आ रहे हैं। उनके मन में कभी भी खौफ नहीं आया। उन्होंने यह भी बताया कि 1980 में जब उनके एक मित्र को खून की जरूरत थी, तब उन्होंने पहली बार उसे खून दिया था। उसकी जिंदगी बचने के बाद फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। हर जान की कीमत मुझे अपने दोस्त की तरह ही प्यारी लगती है। उन्होंने युवाओं और आम नागरिकों को संदेश दिया कि यदि खुद स्वस्थ हों तो दूसरों के जीवन के लिए रक्तदान जरूर करना चाहिए। इससे खुद की सेहत को कोई नुकसान नहीं होता है। खून दान करने से एक अलग संतोष मिलता है। इससे बड़ा दान कुछ नहीं हो सकता है।
2500 रक्तदाताओं का नेतृत्व करते हैं शब्बीर
शब्बीर मौजूदा समय में करीब 2500 वालंटियर्स की टीम को लीड का नेतृत्व करते हैं जो हर तरह की स्थिति में मजबूर लोगों को रक्तदान करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। घाटी में कई बार ऐसी स्थिति पैदा हुई, जब अस्पतालों में भारी संख्या में घायल पहुंचे और उस समय उनकी टीम रक्तदान करने के लिए मौजूद रही। हाल ही में 8 जून को भी शब्बीर ने एक जरूरतमंद परिवार के सदस्य को खून दिया था।