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छह साल से कैंसर इंस्टीट्यूट को नहीं मिल पाई गति

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सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कैंसर इंस्टीट्यूट अब भी सपना
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सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद केंद्र से जारी नहीं की गई राशि
जम्मू संभाग में हर साल दो हजार कैंसर के नए मरीज के आ रहे मामले
पुरुषों में मुंह, गले और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की शिकायत बढ़ी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्र सरकार की मंजूरी के बावजूद सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जम्मू में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट अभी सपना बना हुआ है। 120 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस पांच मंजिला इंस्टीट्यूट का पिछले छह साल में निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। इंस्टीट्यूट के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद ढांचे के निर्माण के लिए केंद्र से राशि जारी नहीं की गई है। इसके अलावा राज्य में स्किम्स श्रीनगर में एक अन्य कैंसर इंस्टीट्यूट का निर्माण होना प्रस्तावित है। वर्ष 2018 के अंत में दोनों इंस्टीट्यूट को मंजूरी मिली थी।
जम्मू में कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए वर्ष 2014 में कवायद शुरू हुई थी, जिसके लिए रेशम घर स्थित एम्स की तर्ज पर स्थापित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में साइट फाइनल की गई है। इस प्रोजेक्ट का नान कम्यूनिकेवल कंट्रोल आफ स्ट्रोक, डायबिटीज और कैंसर प्रोग्राम के तहत निर्माण किया जाना है। रियासत में एक लाख की आबादी पर औसतन 150 कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में कैंसर के मामले अस्पतालों में रिपोर्ट नहीं हो रहे हैं। तंबाकू पदार्थों के सेवन से युवाओं में मुंह और गले (थ्रोट) के कैंसर की शिकायत बढ़ी है। चालीस की उम्र के बाद होने वाला यह कैंसर अब 20-30 साल के युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। जीएमसी जम्मू के कैंसर यूनिट में वर्ष 2018 में 2400 नए मामले पहुंचे, जिसमें 50 फीसदी तंबाकू और धूम्रपान से जुड़े हुए थे। हर साल 2000 से 2500 के बीच कैंसर के नए मामले आ रहे हैं। पुरुषों में मुंह, गले के बाद फेफड़े, फूड पाइप और मैदे का कैंसर सामान्य है। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की समस्या बढ़ी है।
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इस साल शुरू होने की उम्मीद
क्षेत्रीय कैंसर संस्थान जीएमसी के एचओडी व नोडल अधिकारी डा. आशुतोष गुप्ता ने बताया कि रियासत में कैंसर के मरीजों का आंकड़ा बढ़ा है। स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट को मंजूरी मिली हुई है, उम्मीद है कि केंद्र से इस साल राशि जारी होने पर इस पर काम शुरू हो जाएगा।

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