जम्मू। जम्मू-कश्मीर में नशे का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है, लेकिन इसके खिलाफ कार्रवाई उतनी असरदार नहीं दिख रही। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि साल 2019 से 2024 तक छह वर्षों में प्रदेश में एनडीपीएस एक्ट के तहत 13,186 लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन इनमें से सिर्फ चार को ही सजा हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में बीते तीन वर्षों के दौरान 37,631 किलो नशीला सामान भी जब्त किया गया है। इसमें हेरोइन, चरस, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स जैसी कई घातक चीजें शामिल हैं। यह रिपोर्ट उन राज्यों की स्थिति पर आधारित है, जिनकी सीमाएं पाकिस्तान से लगती हैं। इसमें जम्मू-कश्मीर के अलावा पंजाब, राजस्थान और गुजरात भी शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन राज्यों में पाकिस्तान की सीमा से सबसे अधिक ड्रग्स की घुसपैठ होती है। इसके पीछे पाकिस्तान में सक्रिय तस्करों का नेटवर्क और उनके स्थानीय सहयोगी जिम्मेदार हैं।
कानून तो सख्त, पुलिस नहीं कर पाती सही से जांच
पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुभाष गुप्ता ने बताया कि एनडीपीएस मामलों में कानून बेहद सख्त है, लेकिन सबसे बड़ी कमी पुलिस की जांच में है। इन मामलों में पुलिस की जांच का स्तर काफी कमजोर होता है। न तो पर्याप्त साक्ष्य पेश किए जाते हैं और न ही निर्धारित प्रक्रिया का पालन होता है। कई बार गवाह भी मुकर जाते हैं, जिससे आरोपी छूट जाते हैं। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता निर्मल कोतवाल ने भी आरोपियों को सजा न मिलने के लिए पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को ही जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अगर जांच का स्तर सुधरे, तो सजा मिलने की दर में सुधार हो सकता है।
एनडीपीएस मामलों में गिरफ्तार आरोपी, जब्त ड्रग्स और सजा पाने वाले आरोपी
साल गिरफ्तार आरोपी जब्त ड्रग्स (किलो में) सजा मिली
2022 2755 20,857 1
2023 3072 11,066 0
2024 1673 5708 1
नोट: वर्ष 2019 और 2021 में भी एक-एक आरोपी को सजा मिली।
स्रोत – नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी)