घाटी के बाढ़ पीड़ित इलाकों में जिन्दगी अब सामान्य होने की उम्मीद जगी है। श्रीनगर शहर में कई इलाकों से पानी निकल चुका है लेकिन कुछ इलाकों में अब भी पानी भरा है। सेना और एनडीआरएफ का राहत कार्य जारी है। सेना के प्रयास से जम्मू श्रीनगर हाईवे एकतरफा खुल गया है।
इस वजह से अब राहत सामग्री सड़क मार्ग से भेजना शुरू हुआ है। हवाई जहाज से राहत सामग्री भेजना बंद कर दिया गया है। बडगाम से बारामूला तक रेल सेवा बहाल कर दी गई है। श्रीनगर में बाढ़ का पानी निकालने के लिए लगातार बड़े-बड़े पंप चल रहे हैं। बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए टीमें गठित कर दी गई है।
जम्मू तथा कश्मीर संभाग को आधारभूत ढांचा निर्माण के लिए सौ-सौ करोड़ रुपये दिए गए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक लगभग ढ़ाई लाख लोगों को बचाया गया है।
मरने वालों में दो बच्चे भी शामिल
राहत एवं बचाव कार्य में लगी टीम को श्रीनगर के जवाहर नगर इलाके में बाढ़ से गिरे एक मकान में 13 शव मिले। इनमें तीन बच्चे और दो बुजुर्ग हैं। इनमें से चार को निकाल लिया गया है। फिलहाल शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी है, लेकिन देखने से यह लगता है कि वे कश्मीरी नहीं हैं।
राजबाग तथा जवाहर नगर इलाके से बाढ़ का पानी निकालने के लिए 30 पंप लगाए गए हैं, लेकिन पिछले 24 घंटे में केवल कुछ इंच ही जलस्तर घटा है। घाटी में बीमारी न फैले इसके लिए स्वास्थ्य टीमें भी लगाई गई हैं। क्लोरिन की दवाइयां बांटी जा रही हैं। हालांकि, बदबू के कारण लोगों का बुरा हाल है।
पिछले 13 दिन बाद जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को मंगलवार को खोला गया। आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार मंगलवार तथा बुधवार को दो दिन केवल राहत सामग्री वाले वाहनों को जम्मू से श्रीनगर जाने दिया जाएगा।
18 को श्रीनगर से जम्मू के लिए खुलेगा रास्ता
18 सितंबर को श्रीनगर से जम्मू सवारी वाहनों को आने की अनुमति होगी। अगले दो दिन 19 एवं 20 सितंबर को जम्मू से श्रीनगर तक यातायात चालू किया जाएगा। भारी वाहनों को स्थिति सामान्य होने तक नहीं जाने दिया जाएगा। केवल हल्के वाहनों को किश्तवाड़, सिंथनटाप के रास्ते श्रीनगर जाने दिया जाएगा।
सैन्य प्रवक्ता कर्नल एसडी गोस्वामी के अनुसार अब तक सेना तथा एनडीआरएफ की टीम ने 2.37 लाख लोगों को सुरक्षित निकाला है। वायु सेना की ओर से 3887 टन राहत सामग्री गिराया गया है। वातलब, विदीपुरा, टंकपुरा में नेवल कमांडो भी बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। पानी घटने के साथ जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ा है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला स्वयं राहत एवं पुनर्वास कार्यों की देखरेख कर रहे हैं। वे लगातार स्थितियों की समीक्षा कर मातहतों को आवश्यक निर्देश दे रहे हैं। बकौल उमर घाटी में अबतक बाढ़ से पचास से अधिक लोगों के मरने की खबर है।