फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कश्मीर के तेरह और विद्यार्थियों के सपने टूटे

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रधानमंत्री स्पेशल स्कालरशिप स्कीम के तहत घाटी से बाहर उच्च शिक्षा हासिल करने गए कश्मीरी छात्र एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। इस बार किसी क्रिकेट मैच पर हुए विवाद या हुड़दंगबाजी करने को लेकर नहीं, बल्कि इस बार उन्हें कालेज से निष्कासित किया गया है।
विज्ञापन


यह घटना है हरियाणा के रोहतक इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट (आरआईईएम) की, जहां 13 कश्मीरी छात्रों को कालेज प्रबंधन द्वारा निष्कासित किया गया है। छात्रों के अनुसार इसमें उनका कोई दोष नहीं है, बल्कि किसी और की गलती के चलते भुगतना उन्हें पड़ रहा है।

इससे उनका भविष्य खतरे में दिख रहा है। आरआईईएम में बीटेक की पढ़ाई करने वाले नासिर सोफी ने अमर उजाला को फोन पर बताया कि वर्ष 2013 में श्रीनगर की राइट एजूकेशन कंसल्टेंसी द्वारा उनका एडमिशन इस कालेज में करवाया गया था।
विज्ञापन

पहले उन्हें हॉस्टल से निकाला

उस समय उन्हें आश्वासन दिलाया गया था कि उनकी पढ़ाई का खर्च प्रधानमंत्री स्पेशल स्कालरशिप स्कीम के अंतर्गत एचआरडी मिनिस्ट्री द्वारा उठाया जाएगा, लेकिन दो साल बीतने को है, ऐसा कुछ नहीं हुआ।

नासिर के अनुसार एक महीना पहले उन्हें हॉस्टल से निकाला गया और अब कालेज से भी निष्कासित कर दिया गया। उनके अनुसार अब उनकी परीक्षा को एक महीना ही रह गया है, लेकिन उन्हें ऐसा लगता है उन्हें परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा।

उनका यह भी कहना है कि कंसल्टेंसी और कॉलेज प्रबंधन द्वारा आश्वासन दिलाया गया था कि आप पढ़ाई पर ध्यान दें, आपकी स्कालरशिप आ जाएगी, लेकिन अब जब हम उनसे बात करने की कोशिश करते हैं उनका व्यवहार उनके साथ ठीक नहीं होता।
विज्ञापन

मिनिस्ट्री ने 13 छात्रों की पढ़ाई के ल‌िए पैसे नहीं द‌िए

नासिर ने बताया कि वह सभी छात्र अब आस लिए फिलहाल किराये के तीन कमरों में गुजारा कर रहे हैं। वह सिर्फ अपील ही कर सकते हैं कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ न करें।

जब रोहतक इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट के प्रबंधन से संपर्क किया गया, तो इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डा. चावला ने बताया कि जब इन छात्रों का एडमिशन हुआ था तब कुल 23 छात्र थे, जिनमें से एचआरडी मिनिस्ट्री द्वारा 10 का अप्रूवल भेज दिया गया था।

बाकी के 13 का मिनिस्ट्री के पास अपर्याप्त धन होने के कारण अप्रूवल नहीं भेजा गया, जो एआईसीटी की वेबसाइट पर भी देखा जा सकता है। इस कारण से इन बाकी के बच्चों की स्कालरशिप कालेज को नहीं मिल पाई। अब करीब दो साल होने को है और उन्होंने कहा कि फंड रिलीज नहीं होगा।

अपनी सफाई देते हुए कॉलेज डायरेक्टर ने कहा कि इन छात्रों को कॉलेज ने कंसेशन देकर पढ़ाई जारी रखने को कहा गया था, लेकिन किसी कारणों से वह नहीं आ रहे। गौरतलब है कि यह मामला पीएमओ कार्यालय तक भी पहुंच चुका है और पीएमओ में एमओएस का पद संभालने वाले डा. जितेंद्र सिंह द्वारा भी मामले में पूर्ण सहायता का आश्वासन दिलाया गया है।

उन्होंने कहा कि वह हमेशा छात्रों के मसलों को लेकर गंभीर हैं और जब उनके पास मामले की पूरी जानकारी आएगी, तो इसमें कार्रवाई की जाएगी। गलती चाहे किसी की भी हो, लेकिन फिलहाल एचआरडी मिनिस्ट्री और कॉलेज प्रबंधन के बीच पैदा हुई स्थिति का खामियाजा गरीब छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें