तबाही मचाने वाली बारिश ने पूरे जिले में 125 से ज्यादा सड़कों को क्षतिग्रस्त किया है। मौसम साफ होने के कई दिन बाद भी जिला प्रशासन 50 प्रतिशत के करीब सड़कों को मरम्मत करवाकर खुलवा नहीं पाया है।
आज भी कई ग्रामीण इलाके सड़कें बंद होने के कारण जिला मुख्यालय से कटे हुए हैं। ग्रामीण हर रोज कई किलोमीटर का पैदल सफर करने को मजबूर हैं। पिछले दिनों तीन दिन की मूसलाधार बारिश का कहर जिले की सड़कों पर भी पड़ा है। पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई ने जब सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का आंकड़ा तैयार किया तो पता चला कि 125 से ज्यादा सड़कें बारिश के कहर की भेंट चढ़ गई हैं।
सड़कें बंद होने के कारण छह सितंबर को यह मार्ग क्षतिग्रस्त होने के कारण पूरी तरह से बंद हो गए थे। मौसम साफ होने के बाद पीएमजीएसवाई व पीडब्ल्यूडी ने सड़कों की मरम्मत का कार्य शुरू करवाया, लेकिन नुकसान इतना ज्यादा है कि अभी तक सड़कों की मरम्मत नहीं हो पा रही है।
मरम्मत या फिर मलबा न हटाए जाने के कारण अभी तक घोरडी, बरमीन, डुडू, बसतंगढ़, थाती, लाटी व अन्य कई दूर दराज ग्रामीण इलाकों में सड़कें बंद पड़ी हैं। हर रोज लोग सड़कों की मरम्मत की मांग को प्रशासन के सामने रख रहे हैं। प्रशासन की तरफ से पीडब्ल्यूडी व पीएमजीएसवाई को निर्देश जारी किए जा रहे हैं, लेकिन दोनों विभाग मिलकर भी सड़कों की मरम्मत या फिर मलबे को हटा नहीं पा रहे हैं।
सड़कें बंद होने के कारण दूरदराज ग्रामीण इलाकों के ग्रामीणों को हर रोज पैदल सफर करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बीमार को अस्पताल तक पहुंचाना उनके लिए परेशानी का सबब बन चुका है। विकास के लिए सड़कें मुख्य होती हैं, लेकिन उनके इलाके जिला मुख्यालय से कटने के बाद दिन ब दिन पिछड़ने लगे हैं। उनकी मांग है कि प्रशासन इसको गंभीरता से लेकर सड़कों की मरम्मत व मलबा हटाकर समस्या को दूर करे।