पुलवामा जिले के राजपोरा इलाके में हुई मुठभेड़ में मारा गया एक आतंकी ऐसा था, जिसने महज 12 दिन पूर्व ही यह रास्ता अपनाया था।
घटना के दौरान ही मौके पर पहुंचे उसके पिता ने उसे हथियार डालने के लिए कहा, लेकिन उसके आतंकी कमांडर अल्ताफ ने ऐसा करने की इजाजत नहीं दी और सुबह गोलियों से छलनी शव घटनास्थल से मिला, जिसे देख कर उसके पिता फूट-फूट कर रो पड़े।
दरअसल बडगाम जिले के पथरपोरा इलाके का रहने वाला शौकत अहमद डार (22) कब मौत के रास्ते पर निकल पड़ा, उसके पिता को पता ही नहीं चला।
18 घंटों तक चली मुठभेड़
शौकत 19 अगस्त को अचानक घर से लापता हुआ था। घर वालों को जैश-ए-मोहम्मद गुट में शामिल होने की जानकारी तब मिली, जब 18 घंटे चली मुठभेड़ के दौरान पुलवामा पुलिस ने उसको यह सूचना दी कि जिन आतंकियों से मुठभेड़ चल रही है, उसमें उसका बेटा भी शामिल है।
पुलवामा के जिला पुलिस अधीक्षक तजेंद्र सिंह ने बताया कि शौकत ने कुछ दिन पहले ही आतंकवाद का रास्ता चुना था। घटनास्थल पर मौजूद तीन आतंकियों में जब उसके शामिल होने की जानकारी हुई तो उसे बचाने के लिए उसके पिता को वहां बुलाया गया।
बाप कहता रहा, बेटा हथियार डाल दे
लाउडस्पीकर पर पिता ने कई बार उससे हथियार डालने की अपील की। दोनों के बीच फोन पर भी बातचीत हुई।
वह हथियार डालना भी चाहता था ,लेकिन उसके कमांडर अल्ताफ ने उसे इसकी अनुमति नहीं दी और वह मारा गया।