आतंकी जिस तेजी से एकसाथ आ रहे हैं, उससे किसी बड़े आतंकी हमले से इनकार नहीं किया जा सकता। इन आतंकी संगठनों ने घाटी में आज तक साझा हमला नहीं किया, लेकिन नई रणनीति के तहत अब हमले में हिजबुल-लश्कर के आतंकी शामिल हो सकते है। फिलहाल जैश इस रणनीति से दूर है।
हिज्ब आतंकी बने नवीद के नए साथी
जेल में रहते समय ही नवीद जट हिज्ब से जुड़ने का मन बना चुका था। जेल में उसने हिजबुल के लिए सारा नेटवर्क तैयार किया। इसी शर्त पर हिजबुल ने उसे अस्पताल से भगाने का जिम्मा भी लिया।
नवीद को लश्कर के स्थानीय और विदेशी आतंकियों के बीच तालमेल बनाने और उनकी आतंकी गतिविधियों को संचालित करने का भी जिम्मा सौंपा गया है। सूत्रों के मानें तो इसका कारण यह भी है कि घाटी में अपना वजूद खो चुका लश्कर लगातार कमजोर हो रहा है। शायद इसीलिए नवीद हिज्ब के साथ हो गया।