आरएस पुरा। उपजिला अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कहा गया कि अस्पताल को कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर का दर्जा तीस साल पहले मिला और अब उपजिले में जनसंख्या में काफी बढ़ोतरी हो गई है, लेकिन दवाइयां पहले की तरह मुहैैया कराई जा रही हैं। इसके चलते यहां आने वाले रोगियों को बाजार से दवाइयां खरीदनी पड़ रही है।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेता मोहन सिंह चौधरी ने कहा कि पांच माह पूर्व हड्डी रोग विशेषज्ञ के सेवानिवृत्त होने पर दूसरा डाक्टर नहीं लगाया गया। नाक, कान, गला और स्त्री रोग विशेषज्ञ डाक्टरों की सेेवाएं लोगों को नहीं मिल रहीं। केंद्र सरकार की आरोग्य योजना जिसे आयुष्मान भारत का नाम दिया गया है का लाभ भी लोगों को नहीं मिल रहा। केंद्र व राज्य सरकार को चाहिए कि अस्पताल बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।
चौ. मोहन सिंह ने कहा कि नया भवन बना होने पर इसे प्रयोग में नहीं लाया जा रहा है और पुराने भवन में रोगियों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
प्रदर्शन में शामिल चमेल सिंह भूपिंद्र सिंह, जागीर सिंह, रूप लाल, मदन लाल, प्रकाश सिंह, ओम प्रकाश शर्मा आदि ने कहा कि रात के समय अस्पताल में एक डाक्टर की सेवा होने पर कई बार कोई दुर्घटना होने पर घायलों को सही उपचार नहीं मिल पाता है। लाखोें रुपये खर्च कर रात में डाक्टरों के रहने के लिए भवन होने पर डाक्टरों की सेवाएं नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि अगर एक हफ्ते के भीतर अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने का प्रबंध नहीं किया गया तो सड़क मार्ग बंद कर आंदोलन किया जाएगा, जिसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी
मरीजों की नहीं हो पाती है उचित देखभाल
अमर उजाला ब्यूरो
सांबा। जिला अस्पताल को जिले का दर्जा तो दिया गया लेकिन स्टाफ आज भी उप जिला अस्पताल का ही चल रहा है। इससे लोगों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। छोटे से हादसे में घायल को भी रेफर कर दिया जाता है। यहां डाक्टरों की बड़े पैमाने पर कमी है जिससे मरीजों की उचित देखभाल नहीं हो पा रही है।
समाजसेवी कमल भट्टी, विकेश अंबा, छात्र नेता लक्की सिंह साम्बयाल, राजीव सिंह आदि ने बताया कि जिला अस्पताल में 400 मरीज हर रोज पहुंच रहे हैं। ओपीडी का इन दिनों बुरा हाल है। बच्चों के विशेषज्ञ डॉ. दो माह से छुट्टी पर हैं। फिजीशियन भी अवकाश पर हैं। सर्जन डॉ. आपरेशन में रहने के कारण मरीज काफी परेशान रहते हैं। मरीजों के लिए ओपीडी इमरजेंसी में लगाई गई है। ऐसे में यदि कोई बड़ी घटना घट जाए तो डॉ. ओपीडी देखेंगे या हादसे के शिकार लोगों को। उन्होंने कहा कि अस्पताल को जिले के दर्जा दिए जाने के साथ स्टाफ में भी बढ़ोतरी करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। अस्पताल आने वाले मरीज इलाज के लिए भटकते रहते हैं। पहले ब्लड बैंक केे लिए मांग उठाई थी अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने राज्यपाल से मांग उठाई है कि जिला अस्पताल की भी सुध ली जाए ताकि लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।
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जिला अस्पताल में फिलहाल एक सर्जन है। फिजीशियन छुट्टी पर है। वह आने वाले हैं। बच्चों के डॉक्टर छुट्टी पर हैं। उनके स्थान पर रामगढ़ से सप्ताह में चार दिन डॉक्टर जिला अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
-डॉ. इंदिरा वटियाल, मेडिकल सुप्रीटेंडेंट, जिला अस्पताल, सांबा