जम्मू। रियासत में लुप्त होती 50 लोक कलाओें का डाक्यूमेंटेशन अधर में लटका है। बीते एक वर्ष में डाक्यूमेंटेशन वर्क पर कला संस्कृति और भाषा अकादमी कछुआ चाल रही है। 2017 में ही अकादमी ने एक आदेश जारी कर लोक कलाओं के डाक्यूमेेंटेशन के लिए आवेदन मांगे थे। 128 आवेदन आए भी थे, जिनमें करीब 30 का चयन किया गया था। बावजूद इसके कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
योजना के तहत रियासत की तीनोें खित्तों में लुप्त होती लोक कलाओं का डाक्यूमेंटेशन कर उनका संरक्षण किया जाना था। बढ़ती आधुनिकता के कारण लोक कलाएं लुप्त होती जा रही हैं। डाक्यूमेंटेशन में डोगरी, कश्मीरी, लद्दाखी, पहाड़ी और अन्य स्थानीय भाषाएं हैं। सबकी अपनी-अपनी लोक कलाएं हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट का 50 लाख का बजट है। प्रति डाक्यूमेंट्री बनने वालों को अकादमी 1 लाख की आर्थिक मदद देगी। एक डाक्यूमेंट्री की समय सीमा 40 मिनट तक होेगी।
डाक्यूमेंटेशन का काम मार्च के अंत तक पूरा हो जाएगा। आगामी कुछ दिनों में डाक्यूमेंटेशन की अंतिम रूपरेखा तय हो जाएगी। काम तेजी से चल रहा है।
डॉ. अजीज हाजनी, सचिव, भाषा अकादमी