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अपने ही देश में शरणार्थियों की तरह जीवन यापन कर रहे कश्मीरी पंडित

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जम्मू। कश्मीरी पंडित समुदाय अपने ही देश में शरणार्थियों की तरह जीवन यापन करने को मजबूर हैं। बिखराव के कारण समुदाय की पहचान खतरे में पड़ गई है। नरसंहार के कारण पंडितों को अपनी जगह छोड़कर दूसरी जगहों में जाकर बसना पड़ा है। पंडितों को उनके अधिकार मिलने चाहिए। मांगों के हल के लिए पनुन कश्मीर के अध्यक्ष अश्वनी चुरंगू ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है।
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उन्होंने यह भी मांग की कि समुदाय के लोग दूर जाने के लिए विवश है। बिखराव को खत्म करने के लिए केंद्रीय नौकरियों में एक हजार पद सृजित किए जाएं। युवा कश्मीरी पंडितों को रोजगार राज्य में दिया जाए। इससे पंडित अपनी मातृभूमि में ही रह सकेंगे। यह सरकार की और से पंडितों के उत्थान के लिए उचित कदम होगा। साथ ही राहत भत्ता प्रति व्यक्ति पांच हजार जबकि प्रति परिवार बीस हजार तक बढ़ाया जाए है। पांच साल में एक बार ही राहत भत्ते में बढ़ोतरी हुई है। वित्त मंत्री इसे वोट आफ अकाउंट में पेश करें। इससे चुनाव के दौरान अचार संहिता में भी कश्मीरी पंडितों के हित में काम होता रहेगा। पनुन कश्मीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्थन करता रहेगा। जल्द से जल्द पीएम कश्मीरी पंडितों की मांगों को हल करवाएं।
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