मनरेगा योजना के तहत दर्जनों पंजीकृत जॉब होल्डरों के कार्ड रद्द किए जाने से गुस्साए हमीरपुर के ग्रामीणों ने जिला सचिवालय में जमकर प्रदर्शन किया। खंड विकास कार्यालय पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विभाग के कुछ अधिकारियों को नामजद करते हुए धांधली के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
ग्रामीणों ने ऐसे अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि जल्द ही न्याय नहीं मिला तो सैकड़ाें की तादाद में ग्रामीण राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाने को मजबूर हो जाएंगे।
सोमवार को जिला सचिवालय परिसर में जिला विकास आयुक्त से न्याय की गुहार लगाते हुए ग्रामीणों ने ग्रामीण विकास विभाग में मनरेगा के तहत की जा रही धांधलियों को उजागर किया। परिसर में नारेबाजी करते हुए लोगों ने मांग करते हुए कर्मचारियों को निष्कासित किए जाने और जांच की भी मांग की है।
प्रदर्शनकारियों में शामिल नरेश खजूरिया ने बताया कि हमीरपुर पंचायत के अधीन वर्ष 2010 में सैकड़ाें लोगों ने मनरेगा जॉब कार्ड बने थे। सरकार द्वारा हर परिवार के एक व्यक्ति को सौ दिन के रोेजगार की गारंटी दी गई, लेकिन विभाग में बैठे कुछ कर्मचारियों ने जानबूझ कर कई लोगों को सरकार की इस स्कीम का लाभ लेने से वंचित कर दिया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 के लिए जॉब कार्ड रिन्यू किए जाने थे, तो वहीं विभाग के एक जीआरएस और ग्राम सेवक ने दर्जनों जॉब कार्ड रिजेक्ट कर दिए।
उन्होंने कहा कि कायदे से इन जॉब कार्ड को रिन्यू किया जाना था। अनीता शर्मा ने बताया कि निर्मल भारत अभियान के तहत बीपीएल और अन्य जरूरतमंदों को नकारते हुए विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी कर्मचारियों और बेहतर जिंदगी बसर करने वाले लोगों को लाभ दिए गए। यही नहीं, एक-एक परिवार को चार-चार बार शौचालय निर्माण के लिए पैसा जारी किया गया।
विभागीय कर्मचारियों ने गरीब लोगों को भी शौचालय निर्माण करने को कहा, लेकिन कार्यालय पूछताछ करने पर पता चला कि जरूरतमंद लोगों के नाम सूची से गायब हैं। इसकी शिकायत बीडीओ से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, कर्मचारियों का रवैया भी ग्रामीणों के प्रति सही नहीं है।
प्रदर्शनकारियों में शामिल विशंभर दास, रामपाल, सतपाल, मनोहर लाल आदि ने जिला विकास आयुक्त से विभागीय जांच और ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।