जिले की नहरों की सफाई महज कागजों तक सिमट कर रह गई है। नहरों की मरम्मत भी सही तरीके से नहीं की गई है। हाल यह है कि पानी छोड़ने पर यह लीक होकर रास्तों पर बह रहा है। यहां तक कि नहरों में कई जगह गाद जमने से भी पानी का बहाव रुक रहा है।
सिंचाई के लिए बनाई गई नहराें की हर वर्ष सफाई की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह सही से नहीं हो पाती है। इस बार नहरों की मरम्मत का कार्य भी किया गया था, लेकिन चंद स्थानों पर मिट्टी के बैग लगाकर महज खानापूर्ति कर दी गई। जब नहरों में पानी छोड़ा गया तो यह लीक होकर बाहर बहने लगा।
रास्तों पर पानी भर जाने से मुसीबत और बढ़ गई। रामपाल, सुरेश कुमार, प्रेम लाल, कृष्ण आदि ने बताया कि प्रशासन को नहरों की सही से मरम्मत करानी चाहिए। नहरें लीक होने से आम लोगों को परेशानियों और बढ़ जाती हैं। सफाई और मरम्मत के दौरान अधिकारियों को बारीकी से निरीक्षण करना चाहिए था। उस समय इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।