पंचैरी के सद्दल गांव में भूस्खलन में दबे लोगों के शव निकालने में प्रशासन की नाकामी के खिलाफ भारी संख्या में महिलाओं ने रविवार को जिलाधीश कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
भमाग क्षेत्र से आई महिलाओं ने प्रदर्शन के दौरान बताया 21 दिन बीत चुके हैं। अभी तक केवल 14 लोगों के शव ही मिल पाए हैं। सद्दल में 35 लोगों ने अपनी जानें गवाई हैं, लेकिन विडंबना है कि अभी भी 27 लोग जमीन मेें दबे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया बचाव कार्य में जम्मू और उधमपुर से भेदभाव किया जा रहा है। एक तरफ, भारत का यान मंगल ग्रह तक पहुंच गया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मेें इतिहास रच रहा है।
वहीं दूसरी और उधमपुर के लोगों से अन्याय हो रहा है। जिसका खामियाजा दूरदराज के लोग भुगत रहे हैं। आज भी अगर किसी वीआईपी के साथ कोई घटना होती है तो पूरी सरकार और प्रशासन का अमला एड़ी-चोटी का जोर लगा देता है। इसके विपरीत सद्दल में आम लोग दफन हो गए। उनके शवों की भी तलाश नहीं की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि भारत सरकार और अन्य राज्यों द्वारा भेजी गई रिलीफ वितरित किया जा रहा है। ऐसे दावे किए जा रहे हैं। जबकि जमीनी स्तर पर अब भी राहत और बचाव कार्य नहीं हो रहा है। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आशा रानी ने कहा कि ज्यूडिशियल कमेटी का भी गठन किया गया है। कमेटी के आदेश के बावजूद राहत सामग्री को बांटने में भेदभाव बरता जा रहा है।
राहत सामग्री लोगोे के पास नहीं पहुंच रही है इसे बीच रास्ते में ही छुपाया जा रहा है। राशन गोदामों में सड़ रहा है। महिलाओं ने प्रशासन की निंदा करते हुए चेतावनी दी कि अगर लोगों की सही तरीके से सुध नहीं ली गई तो पंचायत और जिला स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे।