बरसात के मौसम में रोजाना अस्पताल पहुंच रहे 15 से 20 वायरल से पीड़ित मरीज
अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट्स उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। मंकीपॉक्स वायरस को हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन ने अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया है। पाकिस्तान सहित अन्य देशों में मंकीपॉक्स के मामले आए हैं। हालांकि, देश में इस तरह का कोई मामला नहीं मिला है, लेकिन फिर भी इससे निपटने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।
इसी कड़ी में जीएमसी उधमपुर प्रशासन की ओर से भी तैयारियां शुरू की गई हैं। अस्पताल में 10 बिस्तरों वाला आइसोलेशन वार्ड तैयार करने के साथ ही पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट्स उपलब्ध करवा ली गई हैं।
गौरतलब है कि इस बरसात में जीएमसी में रोजाना 15 से 20 मरीज वायरल से ग्रसित पहुंच रहे हैं। यह बुखार कम से कम एक सप्ताह तक रहता है। इससे मरीज को पूरे शरीर में कमजोरी व दर्द होता है। इस मंकीपॉक्स वायरस के टेस्ट मौजूदा समय में सिर्फ जीएमसी जम्मू व सौरा अस्पताल श्रीनगर में ही हो रहे हैं।
रोजाना आ रहे हैं वायरल से पीड़ित कई मरीज
बरसात में डेंगू, मलेरिया, डायरिया व हेपेटाइटिस व इन्फेंक्शन वायरल और दस्त जैसी कई बीमारियां होती हैं। हालांकि, जिला में डेंगू के दो मामले मिले थे, लेकिन वह अन्य राज्यों से संबंधित थे। डायरिया व वायरल के रोजाना 15 से 20 मरीज अस्पताल पहुंच रहे है। सबसे पहले उनके डेंगू, मलेरिया, हेपेटाइटिस के टेस्ट करवाए जा रहे है।
मंकीपॉक्स वायरंट से निपटने के लिए अस्पताल में एहतियातन तैयारियां कर ली गई हैं। 10 बिस्तरोें का एक आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। हालांकि, यह वायरस अभी हमारे देश में नहीं आया है। लेकिन, इससे निपटने के लिए जीएमसी प्रशासन तैयार है। पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट्स उपलब्ध करा ली गई हैं।
- मृत्युंजय गुप्ता, प्रिंसिपल, जीएमसी उधमपुर
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यह है मंकीपॉक्स वायरस
मंकीपॉक्स वायरस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर वायरल बीमारी है, जो मानव में जानवरों से फैलती है। इस वायरस का संबंध चेचक से है, लेकिन यह कम घातक होता है। मंकीपॉक्स पहली बार 1958 में बंदरों में पाया गया था, जिसके बाद यह मानव में भी देखा गया। फिलहाल यह मध्य अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से निकलकर दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में पहुंच चुका है।
मंकीपॉक्स के लक्षण
मंकीपॉक्स के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 7 से 14 दिनों के बाद दिखाई देते हैं। इनमें बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ में दर्द, सूजी हुई लिम्फ नोड्स, ठंड लगना, और थकान शामिल हैं। इसके बाद चेहरे, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों में दाने उभरते हैं जो बाद में फफोले का रूप ले लेते हैं।
ऐसे फैलता है मंकीपॉक्स
- मंकीपॉक्स वायरल जूनोसिस डिजीज है। मुख्य रूप से जानवरों से मनुष्यों में फैलता है
- यह संक्रमित जानवरों के काटने, खरोंचने, उनके शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने और हवा में मौजूद एयरोसोल से भी फैलता है।
- मरीज के साथ कप या बर्तन शेयर करने से भी इसका खतरा बढ़ता है
- मरीज के बिस्तर, तौलिया या कपड़ों को छूने या व्यवस्थित करने से भी इसके होने का खतरा होता है
ऐसे कर सकते हैं बचाव
- हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोएं। सेनिटाइजर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं
- मंकीपॉक्स के लक्षणों वाले व्यक्तियों से दूर रहें और यदि किसी संक्रमित व्यक्ति की देखभाल कर रहे हैं, तो मास्क और ग्लव्स पहनें और फिर मरीज के पास से वापस आने के बाद उन्हें अच्छे से डिस्कार्ड करें
- जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें। खासकर बंदरों और चूहों जैसे जानवरों से दूर रहें।
- अगर किसी अन्य वजह से भी त्वचा पर रैश हो रहे हैं तो भी सभी बचाव के तरीकों को अपनाएं। स्वस्थ आहार लें और भरपूर पानी पीएं
- सार्वजनिक व भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। लोगों से हाथ न मिलाएं और गैरजरूरी चीज को न छूएं