शाम ढलने को थी और अंधेरा पांव पसार रहा था। धर्मनगरी के विभिन्न मार्गों पर आवाजाही बढ़ने लगी। बड़ी संख्या में भक्त नंगे पांव निर्धारित गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे। कई हाथों में फूल लिए थे। ऐसा इसलिए था, क्याेंकि शोभा यात्रा शुरू होने का समय हो चुका था। सभी उसका स्वागत करने को इच्छुक थे।
वीरवार की रात पर निकाली गई शोभा यात्रा के धार्मिक दृश्यों में स्कंध माता, राम विवाह, भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को गीता सार सुनाना, परशुराम, गणेश द्वारा शिव पूजा, माता की पालकी और पिंडी स्वरूप की झांकी थी। इसके अतिरिक्त ध्यानु भक्त द्वारा अपना शीश काट मां वैष्णो को अर्पित करने का दृश्य अलौकिक था। वहीं डुग्गर संस्कृति से जुड़ी झांकियों में करवाचौथ, गद्दी परिवार, कुड नृत्य आदि के दृश्य थे।
हर दो झांकियों के ढोलों और नृत्यों की टोलियां थीं। एशिया चौक से शुरू हुई यह शोभायात्रा मुख्य बाजार, अप्पर बाजार, चिंतामणि, डाक बंगला, बाण गंगा मार्ग से होती हुई मुख्य बस स्टैंड पर समाप्त हुई। कटड़ा कल्चरल एसोसिएशन के सौजन्य से निकाली जाने वाली इस शोभा यात्रा में सुरिंद्र खजूरिया, रवि नाग, अनिल दुबे, अमरीश मगोत्रा, गोपाल कोमल, अवतार सोनी राजा भारती आदि का विशेष योगदान था।
वकौल एसोसिएशन प्रधान सुरिंद्र खजूरिया शोभा यात्रा की सांस्कृतिक झांकियों को तैयार करने में समूचे पहाड़ी क्षेत्रों का दौरा कर ग्रामीण सामग्री एकत्रित की जाती है। आयोजक इस प्रस्तुति के लिए कार्य करने को मां वैष्णो देवी की पूजा के समान बताते हैं।