किश्तवाड़। सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों की अब खैर नहीं होगी। जिला मजिस्ट्रेट पंकज कुमार शर्मा ने धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की है। प्रशासन के संज्ञान में आया है कि कुछ असामाजिक तत्व व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर भ्रामक और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील सामग्री फैला रहे हैं।
विशेष रूप से मॉर्फ की गई तस्वीरों और एडिटेड वीडियो के जरिए शांति भंग करने की कोशिश की जा रही है। सोशल मीडिया पर झूठी, मनगढ़ंत या भड़काऊ सामग्री साझा करना दंडनीय अपराध होगा। भ्रामक जानकारी आगे भेजने वाले व्यक्तियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या पोस्ट की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।
रामबन में 60 दिन के लिए सख्त पाबंदी
रामबन। प्रशासन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सख्त शिकंजा कस दिया है। जिला मजिस्ट्रेट मोहम्मद इलियास खान ने धारा 163 के तहत आदेश जारी कर सोशल मीडिया पर भड़काऊ और भ्रामक सामग्री के प्रसार पर 60 दिन की रोक लगा दी है।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है जो व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्रमुख मंचों पर प्रभावी रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धर्म, जाति या क्षेत्र के आधार पर नफरत फैलाने, मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) फोटो-वीडियो साझा करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली पोस्ट करना अब भारी पड़ सकता है।
आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी जिसमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा ग्रुप एडमिन और मॉडरेटर्स को भी उनके प्लेटफॉर्म पर होने वाली गतिविधियों के लिए जिम्मेदार माना जाएगा। जिले में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल सक्रिय कर दिए गए हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और शांति बनाए रखने में सहयोग करें।