उधमपुर के रठियान में कथा सुनाते संत सुभाष शास्त्री व कथा सुनते श्रद्धालु
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उधमपुर। रठियान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन सुभाष शास्त्री ने श्रद्धालुओं को सत्संग का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि जीवन में हमेशा अच्छे लोगों का संग करना चाहिए। बुरे लोगों का संग करने पर गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
उन्होंने कथा सुनाते हुए कहा कि जीवन में दुष्ट व्यक्ति का कभी संग नहीं करना चाहिए। दुष्ट व्यक्ति और सांप में सांप को अच्छा मानें, क्योंकि सांप तो काल वश एक बार ही काटता है, जबकि दुष्ट व्यक्ति बार बार हानि पहुंचाता है। यह ऐसा है, जैसे कोयला न जले तो हाथ को काला कर देता है, और जब जलता है तो जला देता है। ठीक इसी प्रकार दुष्ट व्यक्ति किसी न किसी प्रकार की हानि जरूरी पहुंचाता है।
कथावाचक ने कहा कि मानव को लाभ केवल अच्छी संगत में ही मिलता है, और दुख बुरी संगत में जाने से मिलता है। समय का दुरुपयोग करने से हमेशा हानि होती है। और कर्तव्य का पालन करने से जीवन में सुख मिलते हैं। मन व इंद्रियों को वश में करना ही सबसे बड़ी वीरता है। सद्विद्या मानव की सबसे बड़ी पूंजी है। संतों का संग करने से संतोष मिलता है। सबसे बड़ा सुख संतोष से मिलता है। अपने कर्मों का फल ही भाग्य है। इसलिए, हमेशा संतों का संग कर अच्छे कर्म करें, और संतों का संग कर भक्ति करें।
उधमपुर के रठियान में कथा सुनाते संत सुभाष शास्त्री व कथा सुनते श्रद्धालु- फोटो : UDHAMPUR