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मन की चंचलता के कारण ही मनुष्य दुख प्राप्त करता हैं--संत सुभाष शास्त्री

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उधमपुर के रठियान में कथा सुनाते संत सुभाष शास्त्री व कथा का आनंद उठाते श्रद्धालु - फोटो : UDHAMPUR
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उधमपुर। नगर के साथ लगती रठियान पंचायत के खरूनी गांव में श्रीमद्भागवत कथा बुधवार को भी जारी रही। इसमें स्थानीय संगत के अलावा आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भी कथा का श्रवण किया।
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कथावाचक सुभाष शास्त्री ने कहा कि हर मानव सारा जीवन केवल इसी प्रयास में गंवा देता है कि इस संसार में उपलब्ध विभिन्न वस्तुएं यदि उसे मिल जाए तो वह सुखी हो जाएगा। लेकिन, ऐसा होता नहीं। क्योंकि, जो भी प्राप्त होगा, वह या तो छूट जाएगा, या उससे आपका दिल भर जाएगा। तदोपरांत आप फिर से अशांत हो जाओगे।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रश्न उत्पन्न होता है कि स्थायी शांति कैसे प्राप्त हो सकती है? इसका उत्तर है कि अपने भीतर से। आप सोचते हैं कि यदि शांति (आनंद) भीतर है तो वह मिलती क्यों नहीं? इसका कारण है, हमारा मन। इस मन के कारण ही मनुष्य सुख-दुख को प्राप्त करते हैं। यदि मन सात्विक हो तो मानव देवता, और यदि तामसिक हो तो मानव दानव हो जाता है। और, दानव को कभी शांति प्राप्त नहीं हो सकती। क्योंकि जिसके हर कर्म से कोई न कोई कष्ट को प्राप्त होता है, वह स्वयं कैसे सुख और शांति को प्राप्त हो सकता है?
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कथावाचक ने कहा कि साधक सोचता है कि इस अति चंचल मन को कैसे वश में किया जाए? इसका उपाय है ध्यान, जिससे आप बाहरी संसार को बाहर छोड़कर अपने भीतर की सैर करना आरंभ कर देते हैं। संसार बहुत बड़ा है। लेकिन, आप तो एक हैं। और, आपको उसी एक को ही ढूंढना है। जिस दिन उस एक को जान जाओगे, पहचान पाओगे, उसके उपरांत इस संसार की हर वस्तु आपके लिए तुच्छ हो जाएगी। फिर होगी शांति ही शांति और आनंद ही आनंद।

उधमपुर के रठियान में कथा सुनाते संत सुभाष शास्त्री व कथा का आनंद उठाते श्रद्धालु- फोटो : UDHAMPUR

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