भद्रवाह। बारिश से मैदानों को राहत मिली है, लेकिन पहाड़ों में बेमौसम की बर्फ हजारों कुनबों के लिए आफत बन गई है। प्रदेश के मैदानों और पंजाब के अलग-अलग इलाकों के खानाबदोश (गुज्जर-बक्करवाल) कुनबों के लिए चिनाब घाटी गर्मियों की जीवनरेखा है। इस बार सैकड़ों कुनबे बेमौसम की बर्फ के चलते माल मवेशियों के साथ फंस गए हैं। अत्यधिक ठंड से कुछ मवेशियों के मरने की सूचना है। पहाड़ों पर बर्फ की सफेदी छाने से चारे का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में ये कुनबे आगे बढ़ें या यहीं से लौट आएं, इसी असमंजस में हैं।
डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिलों के उच्च पर्वतीय इलाकों में गुज्जर-बक्करवाल अपना गर्मियों का डेरा डालने पहुंचते हैं। ये कुनबे जम्मू-कश्मीर के मैदानी इलाकों और पंजाब से आते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार चिनाब घाटी में भद्रवाह से बनिहाल की जवाहर टनल और डोडा के मरमत से लेकर किश्तवाड़ के मढ़वा इलाके में खानाबदोश समुदाय की 30 हजार की आबादी लाखों भेड़-बकरियों, भैंसों व अन्य जानवरों के साथ गर्मी के सीजन में पहुंचती है। बड़ी संख्या में कुनबे इस बार बीच रास्ते में पहुंचे हैं, जिन्हें बेमौसम की बर्फबारी से चुनौती मिल रही है। एक अधिकारी ने बताया कि बेमौसम की बर्फबारी से सैकड़ों कुनबे चिनाब घाटी क्षेत्र में अलग जगह-जगह फंस गए हैं। कठुआ जिले के लखनपुर निवासी बशीर भाऊ ने बताया कि वह भद्रवाह के गुलडंडा क्षेत्र में फंस गए हैं। ज्यादा ठंड में 15 मवेशी मारे जा चुके हैं। यहीं रुकें या लौट जाएं, इसका फैसला नहीं कर पा रहे हैं। इसी तरह कठुआ निवासी साईं मोहम्मद ने बताया कि पदरी दर्रे पर जाना था। अब वापस सरथल जाना पड़ रहा है। मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। अंजुमन-ए-तरक्की गोजरी अदब के महासचिव जान मोहम्मद हकीम ने कहा कि सरकार को रेस्क्यू के लिए आगे आना होगा। उन्हाेंने दावा किया कि चिनाब घाटी के पर्वतीय इलाकों में एक लाख से ज्यादा गुज्जर-बक्करवाल माल मवेशियों के साथ जम्मू-कश्मीर के अलावा पंजाब के जालंधर, लुधियाना और होशियारपुर से यहां जाते हैं।
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ये इलाके हैं गर्मियों की जीवनरेखा
अधिकारियों के अनुसार भद्रवाह से सटे कैलाश रेंज, कैंथी, पदरी गली, भाल पदरी, स्योज, शंख पाडर, ऋषि डल, गो पीड़ा, गनथक, खन्नी टॉप, गुलडंडा, छत्तरगला और आशापति ग्लेशियर पर सोमवार रात बर्फबारी हुई है। इसी तरह से बरेड़ बाल, शरोंठ धार, कतारधार, लालू पानी, कलजुगसार, डुग्गन टॉप, गोहा और सिंथन टॉप में भी बर्फ की परत जम गई है। ये तमाम इलाके गुज्जर-बक्करवाल समुदायाें के लिए गर्मी के सीजन की जीवनरेखा हैं।