जिले के दूरदराज ग्रामीण इलाकों की बदहाल सड़कें काल साबित हो रही हैं। इनकी हालत दिन-ब-दिन खस्ता होती जा रही है जो सड़क हादसों की बड़ी वजह बन रही हैं।
2015 में उधमपुर में तीन बड़े सड़क हादसे हुए थे, जिनमें 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 2016 की शुरुआत में केया बस दुर्घटना ने सबको हिला कर रख दिया है।
इन दुघर्टनाओं का मुख्य कारण बदहाल सड़के हैं और प्रशासन आज तक सड़कों की हालत सुधार नहीं पा रहा है। प्रशासन का प्रयास सड़क सुरक्षा सप्ताह के जागरूकता तक ही सीमित है।
उधमपुर से पंचैरी, लांदर, मौंगरी, लाटी, डुडु, बसंतगढ़, दुब्बीगली, घोरडी, बरमीन और अन्य कई ऐसे रूट हैं, जिनकी हालत बहुत ही ज्यादा खराब है।
कई बार मांग करने के बाद भी प्रशासन इन सड़कों की हालत को सुधार नहीं पाया है और लगातार इन मार्गों पर हादसे हो रहे हैं। मई 2015 में चिनैनी-लाटी मार्ग के बीच पड़ते मरोठी में बस दुघर्टना का शिकार हो गई थी।
इसमें 24 लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा घायल हुए थे। अक्तूबर 2015 में रामनगर के डालसर में मेटाडोर दुर्घटना का शिकार हुई थी और इसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी।
पंचैरी के मीर गुलाबन इलाके में टाटा 207 के दुर्घटना का शिकार होने पर चार लोगों की मौत हो गई थी। इससे पहले 2014 में पंचैरी के दुब्बीगली इलाके में बस के दुर्घटना में सात लोगों की मौत हो गई थी।
2016 की शुरुआत में ही केया इलाके में बस दुर्घटना ने बदहाल सड़कों की समस्या को सामने रख दिया है। यह सभी रूट वह रूट है, जिनकी सड़कों की हालत बहुत ही ज्यादा खराब है।
इन पर वाहनों को चलाना जान हथेली पर रखने के बराबर है। जिलावासी आए दिन रूटों की हालत सुधारने की मांग करते हैं। प्रशासन की तरफ से आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन किया कुछ नहीं जाता है।
यातायात विभाग भी सप्ताह के लिए सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाकर जागरूकता अभियान छेड़ता है, लेकिन यह अभियान भी केवल शहरों तक ही सीमित रहता है। ग्रामीण इलाकों में कोई जागरूक करने के लिए नहीं पहुंचता है।