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वाटर एटीएम के स्थान पर दुकानें बनाने की तैयारी

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उधमपुर। शहरवासियों को अब दो रुपये में फिल्टर पानी की सुविधा मिलने की संभावना बहुत कम है। चार वर्ष बाद भी नगर परषिद शहर में चयनित तीन स्थानों पर वाटर एटीएम शुरू नहीं कर सका है। लाखों रुपये खर्च कर दो स्थानों पर तो वाटर एटीएम की मशीनरी भी लगा दी गई है, लेकिन इसके बाद भी आज तक वाटर एटीम शुरू नहीं हो सके हैं। अब नगर परिषद इन तीन स्थानों पर वाटर एटीएम के बजाए दुकानें बनाने की योजना तैयार करना शुरू कर दिया है। नगर परिषद का कहना है कि चार वर्ष से तैयार वाटर एटीएम के ढांचे किसी काम नहीं आ रहे हैं।
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मई, 2017 में नगर परिषद ने शहर में तीन वाटर एटीएम लगाने की योजना तैयार की। लाखों रुपये खर्च कर जून, 2017 में इसके लिए नगर परिषद कार्यालय के बाहर, एमएच चौक और सैलां तालाब में ढांचे भी तैयार कर दिए गए। एक वर्ष के इंतजार के बाद 2018 में एमएच चौक और सैलां तालाब में तैयार किए ढांचों में 30 लाख रुपये खर्च कर वाटर एटीएम की मशीनरी भी लगा दी गई। इसके बाद फिर योजना को लेकर काम बंद कर दिया गया। फिर एक वर्ष के इंतजार के के बाद 2019 में एटीम को खोल कर ट्रायल किया गया। ट्रायल के दौरान सप्ताह तक वाटर एटीएम चले और पानी को फिल्टर किया गया। ट्रायल के बाद फिर से इनको ताला लगाया गया और आज तक इस पर ताला ही लगा है। कोरोना संकट के कारण करीब दस महीने तक इस योजना पर कोई चर्चा नहीं की गई। लेकिन अब 2021 में फिर से लेकर प्रयास शुरू किए हैं। लेकिन वेंडर अभी तक उधमपुर नहीं पहुंचा है। इसलिए नगर परिषद ने अब वाटर एटीएम के स्थान पर दुकानें बनाने की योजना तैयार करना शुरू कर दिया है।
गर्मी में फिर साफ पानी को तरसेंगे शहरवासी
उधमपुर शहर में जन सुविधाओं का बहुत ज्यादा अभाव है। शहर के विभिन्न हिस्सों में पीने के पानी की टंकियां व वाटर कूलर तो लगाए हैं, लेकिन इनमें पानी साफ नहीं होता है। मजबूरन लोगों को पानी की बोतल खरीद कर गुजारा करना पड़ता है। अगर वाटर एटीएम शुरू हो जाते तो लोगों को दो रुपये में एक गिलास फिल्टर पानी पीने को मिलता।
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मुंबई के वेंडर के साथ वाटर एटीमए को लेकर करार किया गया था। मशीनरी लगाने के बाद कांट्रेक्टर ने नगर परिषद के साथ संपर्क नहीं किया। कुछ सप्ताह पहले फिर से वेंडर के साथ संपर्क किया। उसने कहा कि वह जल्द उधमपुर आएगा, लेकिन अभी तक नहीं पहुंचा है। इसको लेकर फिर से प्रयास किया जाएगा, लेकिन फिर भी वह नहीं आता है तो वह फिर इन तीनों के स्थान दुकानें बनाने की योजना तैयार की जाएगी। इससे नगर परिषद को राजस्व तो मिलेगा।
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- संजीव गंडोत्रा, सीईओ, नगर परिषद
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