बंदरों को मारने वालों को हिमाचल सरकार अब इनाम देगी।
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चिनैनी कसबे में बंदरों का आतंक इतना फैल गया है कि छोटे बच्चों को अकेले घर की छत पर भेजना खतरे से खाली नहीं रहा। चिनैनी में लोगों के घरों की छतों पर अक्सर बंदर झुंड के बैठे रहते हैं। वे घर की मुंडेर से आंगन में या रसोई में भोजन झपट कर ले जाने की ताक में रहते हैं।
उनको भगाने की कोशिश करने पर वे दांत दिखाकर और मुंह से आवाजें निकालकर बच्चों पर झपट्टा मारने का भी प्रयास करते हैं। चिनैनी कसबे में बंदरों का आतंक इतना फैल गया है कि हाथ में लिफाफा देखकर ही वे उस पर झपट पड़ते हैं। अक्सर गाड़ी की छत पर लादी गई खाद्य सामग्री को भी वे लेकर भाग जाते हैं।
इतना ही नहीं कसबे के कई घरों से तो बंदरों ने कुंडी खोलकर रसोई में पड़े सामान को भी लेकर चंपत हो गए। जहां यह समस्या नहीं है वे यह जानकर ताज्जुब में पड़ जाएंगे कि चिनैनी में कई बार बंदर बाकायदा फ्रिज खोलकर उसमें से खाने की चीजें लेकर भागते हुए भी देखे गए। कई बार तो सूखने के लिए रखे कपड़ों में से वे कपड़ा लेकर भाग जाते हैं।
जब तक उन्हें खाने को न दिया जाए, वे कपड़ा नहीं छोड़ते।स्थानीय लोगों ने बताया कि कसबे में कई लोगों को अब तक बंदर काट चुके हैं। उन्होंने वन विभाग से बंदरों से निजात दिलाने की मांग की है। विधायक दीनानाथ भगत ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने वाइल्ड लाइफ विभाग से बात की है, ताकि कसबे में बंदरों के आतंक से लोगों को निजात दिलाई जा सके।
लोग अपने ही घर की छत पर जाते समय हाथ में पत्थर या डंडा लेकर ही जाते हैं। बंदर अक्सर पानी की टंकियों के ढक्कन तोड़ देते हैं। इसलिए लोगों ने छत पर लगाई गई पानी की टंकियों को भी लोहे के ढक्कन लगाकर बंद किया है। बंदरों का आतंक इतना ज्यादा है कि झुंड के झुंड वे पानी की टंकी के आसपास जमा हो जाते हैं और कुछ ही मिनटों में टंकी का ढक्कन तोड़कर उसमें पानी पीते हैं। छोटी टंकियों में तो वे बाकायदा नहाते भी हैं।