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Udhampur News: हड़ताल की बढ़ी तपिश, चौथे दिन भी ठप रहीं स्वास्थ्य सेवाएं, मुश्किल में मरीज

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उधमपुर/रियासी। ढाई दिन के वेतन कटौती के खिलाफ पैरामेडिकल स्टाफ का गुस्सा अब उबाल पर है। जम्मू-कश्मीर मेडिकल फेडरेशन के बैनर तले शुरू हुई हड़ताल शनिवार को चौथे दिन भी जारी रही जिससे ओपीडी वेंटिलेटर पर चली गई और केवल इमरजेंसी सेवाएं ही सांसें ले रही हैं। सामान्य उपचार के लिए आने वाले हजारों मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ रहा है।
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जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पैरामेडिकल स्टाफ ने काम का पूर्ण बहिष्कार कर ओपीडी परिसरों में नारेबाजी की। हड़ताल के चलते अस्पतालों का परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। जहां सुबह से मरीजों की लंबी कतारें दिखती थीं वहां अब पैरामेडिकल स्टाफ धरने पर बैठा नजर आ रहा है। ओपीडी समेत अन्य महत्वपूर्ण विभागों के बाहर ताले लटके हैं। हालांकि कर्मचारियों ने आपातकालीन सेवाओं को चालू रखा है लेकिन सहायक स्टाफ की कमी के कारण डॉक्टरों पर दबाव बढ़ गया है। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से किराया खर्च कर पहुंचे मरीजों के लिए हड़ताल दोहरी मार से कम नहीं है। घंटों इंतजार करने के बाद जब उन्हें पता चलता है कि ओपीडी बंद है तो उनकी आंखों में मायूसी और लाचारी साफ देखी जा सकती है।



फेडरेशन का सख्त रुख, अन्याय बर्दाश्त नहीं

जम्मू-कश्मीर मेडिकल फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. धीरज शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई आत्मसम्मान और हक की है। पैरामेडिकल स्टाफ वह वर्ग है जो त्योहारों, आपदाओं और विपरीत परिस्थितियों में भी परिवार को छोड़कर मरीजों की सेवा करता है। ऐसे में उनकी मेहनत की कमाई से ढाई दिन का वेतन काटना उनके समर्पण का अपमान है। फेडरेशन का कहना है कि जब तक वेतन कटौती का आदेश वापस नहीं लिया जाता तब तक आंदोलन और उग्र होगा। रियासी में भी कर्मचारियों ने एलान किया है कि रविवार और सोमवार को भी प्रदर्शन जारी रहेगा।
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मानवाधिकार संगठन ने सरकार को घेरा

हड़ताल के लंबे खिंचने पर अब मानवाधिकार संगठन ने भी चिंता जताई है। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. मुल्खराज भमागी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका खामियाजा गरीब तबके को भुगतना पड़ रहा है। संपन्न लोग निजी अस्पतालों का रुख कर सकते हैं लेकिन सरकारी सुविधाओं पर निर्भर गरीब जनता आखिर कहां जाए? उन्होंने सरकार से मांग की है कि पैरामेडिकल स्टाफ और डेलीवेजर्स की जायज मांगों को तुरंत पूरा किया जाए ताकि स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बहाल हो सकें।
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