उधमपुर। जिला अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। इस अवसर पर अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी में आए लोगों को कृमि संक्रमण के कारणों, लक्षणों और इसकी रोकथाम के लिए किए जाने वाले उपायों की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि एक से 14 साल की आयु के बच्चों में कृमि संक्रमण (पेट के कीडे़) का खतरा अधिक होता है। कृमि बच्चों के भीतर पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा डालते हैं। इनके कारण बच्चों में रक्ताल्पता, कुपोषण, बिगड़ा हुआ मानसिक और शारीरिक विकास जैसे विकार नजर आने लगते हैं। एक बार अगर किसी बच्चे में कृमि प्रवेश कर जाते हैं तो वे पेट की आंतों में घर बना लेते हैं, और अंडे देकर संख्या बढ़ाते हैं। इससे बच्चे जो कुछ खाते हैं, उससे मिलने वाले सारे पोषक तत्वों को ये पेट के कीडे़ सोख लेते हैं।
उन्होंने बताया कि बच्चों के विकास के लिए उनका कृमि मुक्त होना बेहद जरूरी हैं। इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है। इसमें स्कूलों, आंगनबाड़ी, चिकित्सा केंद्रों, आदि पर जागरूकता कार्यक्रम होते हैं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय रैना ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य विशेष तौर पर महिलाओं को पेट के कीड़ों के बारे में जागरूक करना है। इससे बचने का सबसे कारगर उपाय स्वच्छता बनाए रखना है।