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Udhampur News: शवगृह में व्यवस्थाओं की मौत, तपते टीन शेड में लाशें

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उधमपुर। जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर पड़ते शहर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) का शवगृह टीन शेड में चल रहा है। लाशें रखने वाले इस कक्ष में सुविधाओं को देखकर लगता है कि उनकी मौत हो चुकी है। यहां शवों को डीकंपोज होने से बचाने के लिए बनाए गए कोल्ड स्टोरेज चैंबर एक महीने से खराब है। तपते टीन शेड में एक एसी की व्यवस्था जरूर की गई है,लेकिन यह नाकाफी है।
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जानकारी के अनुसार मोर्चरी रूम को 2014 में बनाया गया था। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ होने के कारण यहां रोजाना हादसे होते रहते हैं और लाशें आती रहती हैं। आस-पास होने वाली दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों के शव भी इसी अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए लाए जाते हैं। टीन शैड में बनी इस मोर्चरी में खराब बड़े कोल्ड स्टोरेज के कारण पहचान के लिए रखे गए शवों को डीकंपोज होने से बचाना बड़ी चुनौती है। इसके लिए एसी लगाया गया है लेकिन दिनभर तपा टीन शेड ठंडा करने में यह नाकाफी है। अस्पताल के डॉक्टर खुद मानते हैं कि लाशों को सड़ने से बचाना चुनौती है। गर्मी के दिनों में तो बदबू के कारण पोस्टमार्टम करना मुश्किल हो जाता है। यहां एक माह में 15 से 20 शव पोस्टमार्टम के लिए लाए जाते हैं।




एक से पांच डिग्री के बीच तापमान जरूरी



गौरतलब है कि अस्पताल परिसर में टीन शैड में बनी मोर्चरी में तापमान को एक से पांच डिग्री सेल्सियस के बीच रखना मुश्किल है। बिना कोल्ड स्टोरेज चैंबर के ऐसा करना पाना संभव नहीं है। यहां एक एसी तो लगाया गया है लेकिन यह इतना तापमान नहीं रख पाता जिससे पहचान के लिए शवों को 24 घंटे के बाद बचा पना मुश्किल हो जाता है।
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एसी से आठ घंटे के ऊपर नहीं रख सकते शव को सुरक्षित

पोस्टमार्टम करने वाले स्टाफ के अनुसार शवों को कोल्ड स्टोरेज में बने चैंबर्स में रखकर ही खराब होने से बचाया जा सकता है। एसी से शव करीब 8 घंटे से ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रख सकते। इसके बाद शव से बदबू आना शुरू हो जाती है। रात में लाए जाने वाले शवों को टीन की इस मोर्चरी में सुबह तक रखना पड़ता है, क्योंकि रात में पोस्टमार्टम नहीं होता। मगर, सुबह बदबू आना शुरू हो जाती है।



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मौजूदा समय में मौसम ठंडा है, लेकिन गर्मी में अगर बिना कोल्ड स्टोरेज के शव रखा जाए तो वह 2 से 3 घंटे के बीच में ही खराब होना शुरू हो जाता है। खराब शव का पोस्टमार्टम करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कत्ल या अन्य केसों में सुबूत जुटा पाना भी मुश्किल हो जाता है। इस मोर्चरी रूम में शव को कम समय के लिए ही रखा जाता है। कोई शव रात में लाया जाता है तो सुबह जल्दी हर हाल में पोस्टमार्टम करना पड़ता है। लावारिस शव को रखने में दिक्कत आती है।

-डॉ. अमजद खान



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पहले भी मोर्चरी रूम में बने कोल्ड स्टोरेज चैंबर्स के तार में खराबी आने के कारण इसकी मरम्मत करवाई गई थी। मगर अब यह दोबारा खराब हो गया है। इसके लिए कोल्ड स्टोरेज की मरम्मत करने वाली कंपनी को लिखकर भेज दिया है। जल्द ही इसे ठीक करवा लिया जाएगा।
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-डॉ. मृत्युंजय गुप्ता, प्रिंसिपल जीएमसी
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