- यात्रा की पूर्व संध्या पर काफी संख्या में जम्मू, उधमपुर, अखनूर, कठुआ सहित अन्य जिलों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे
संवाद न्यूज एजेंसी
किश्तवाड़। जम्मू-कश्मीर की प्रसिद्ध 43 दिवसीय मचैल यात्रा 25 जुलाई से शुरू होगी। सुबह 10 बजे से मां चंडी के दरबार के बंद कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे। यात्रा के लिए हेलिकॉप्टर सुविधा नहीं
यात्रा आरंभ होते ही शाम के समय प्रशासन की तरफ से माता के जागरण का आयोजन किया जाएगा। इसमें भजन गायक चमन लहरी, दिलजीत सिंह राठौर, कुमार रवि और अन्य शामिल होंगे। अठोली पाडर में भी मां चंडी के मंदिर में स्थापना दिवस पर जागरण होगा। यात्रा की पूर्व संध्या पर वीरवार को काफी संख्या में जम्मू, उधमपुर, अखनूर और कठुआ सहित अन्य जिलों से यात्री दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं। मचैल में हवन भी किया जा सकता है। इस बार यात्रियों को आठ-नौ किमी ही पैदल सफर करना पड़ेगा। अगर चिशोती में पुल तैयार हो गया तो हमूरी तक वाहन जा सकेंगे।
एसडीएम पाडर डॉ. अमित ने दो दिन पहले बाजार का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। किश्तवाड़ में जिला उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा, एसएसपी नरेश कुमार आदि ने सुरक्षा व्यवस्था और अन्य प्रबंध देख रहे हैं। किश्तवाड़ के कुलीद चौक से पाडर मार्ग पर तारकोल बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। यात्रा में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है। गुलाबगढ़ में भक्तों के लिए टेंट हाउस तो मचैल में पर्यटन विभाग ने टेंट सिटी बनाई है। सर्वशक्ति सेवक संस्था के यात्री भवन में दो से तीन हजार श्रद्धालु रुक सकते हैं। चिशौती में भी मंदिर के साथ भी सराय है।
हर पड़ाव पर चिकित्सा सुविधा रहेगी उपलब्ध
किश्तवाड़ से मचैल तक हर पड़ाव पर चिकित्सक तैनात रहेंगे। इसके अलावा एंबुलेंस की सुविधा भी मिलेगी। सेना की ओर से भी यात्रा को लेकर तैयारी की गई है। अधिकारियों के अनुसार, अठोली. गुलाबगढ़, मस्सू कुंडेल, चिशौती, हमूरी और मचैल में यात्रियों के लिए चिकित्सा व्यवस्था होगी।
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जम्मू से 17 अगस्त को पवित्र छड़ी और ज्योत भवन के लिए करेगी प्रस्थान
मां चंडी की पवित्र छड़ी तथा मां ज्वाला की अखंड ज्योत जम्मू के जैन बाजार से 17 अगस्त को सुबह 7:00 बजे शोभायात्रा के रूप में डोडा, किश्तवाड़, पाडर के रास्ते मचैल भवन की ओर प्रस्थान करेगी। पड़ाव दर पड़ाव पवित्र छड़ी और ज्योत का श्रद्धालु दर्शन भी कर सकेंगे। छड़ी के साथ काफी संख्या में श्रद्धालु ढोल, नगाड़े जैसे वाद्य यंत्रों के साथ मां के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते हैं। 22 अगस्त को सुबह नौ बजे चिशौती से प्रस्थान कर छड़ी माता के भवन (मचैल) में रात्रि विश्राम करेगी। भवन पर 23 अगस्त को सुबह आठ बजे से हवन शुरू होगा। 24 अगस्त को सुबह आठ बजे पवित्र छड़ी की विदाई होगी। अठोली में रात्रि विश्राम के बाद 25 अगस्त को सुबह नौ बजे श्रद्धालु रवाना होंगे। डोडा में यात्रा का समापन होगा।
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पंजीकरण कराना न भूलें
वेबसाइट www.shrmachailmatayatra.com से ऑनलाइन पंजीकरण करें। श्री गौरी शंकर मंदिर सरकूट, गुलाबगढ़ और चिशौती में ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा है। आधार कार्ड के साथ यात्रा/पंजीकरण पर्ची अवश्य ले जाएं। इसे मचैल माता भवन की ओर जाते समय देवंडी मोड़ गुलाबगढ़ और दर्शनी गेट मचैल पर पेश करें। ऑनलाइन या ऑफलाइन यात्रा पर्ची के बिना मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी।
मौसम का रखें ध्यान
-पर्याप्त मात्रा में ऊनी कपड़े अवश्य रखें। मौसम बदलता रहता है। तापमान में गिरावट के साथ ठंड का अहसास बढ़ जाता है।
- यात्रा के दौरान वाटर प्रूफ बैग, छाता, रेनकोट को प्राथमिकता दें।
- दर्शन के लिए आगे बढ़ने से पहले अपनी जेब में अपना पता, मोबाइल नंबर आदि लिखकर रख लें। ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड की छाया प्रति भी रख सकते हैं।
कोई घटना होने पर यहां करें सूचित
किसी भी अप्रिय घटना या समूह के किसी सदस्य के लापता होने की स्थिति में निकटतम यात्रा नियंत्रण कक्ष और विभिन्न स्थानों पर तैनात टीमों को सूचित करें। इसके अलावा बेस कैंप गुलाबगढ़ और मचैल माता मंदिर परिसर में घोषणा कराई जा सकती है।
क्या नहीं करें
-सुबह पांच बजे से पहले और शाम को पांच बजे के बाद यात्रा शुरू न करें।
-मार्ग पर किसी भी प्रकार का शॉर्टकट न अपनाएं। ऐसा करना खतरनाक है।
- चेतावनी वाले स्थानों पर रुकने का प्रयास न करें। बनाए गए रास्ते पर ही चलें।
- प्रतिबंधित पॉलीथीन साथ न रखें। अन्यथा कार्रवाई हो सकती है।
-यात्रा के दौरान महंगे या भारी आभूषण नहीं ले जाएं।
-मादक पदार्थ का सेवन न करें। यह वर्जित है।
रास्ते में पड़ने वाली नदियों में हाथ या कपड़े धोने की कोशिश नहीं करें।