उधमपुर। आज के दौर में खानपान की गलत आदत और शारीरिक गतिविधि के अभाव के कारण फैटी लीवर आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर उभरा है। विशेषज्ञों के अनुसार पहले बीमारी केवल बढ़ती उम्र के लोगों में देखी जाती थी लेकिन अब बच्चे और युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
चिकित्सक सुदेश रैना के अनुसार लीवर शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है जो भोजन से ऊर्जा बनाने का कार्य करता है। जब हम आवश्यकता से अधिक वसा (फैट) का सेवन करते हैं और उसे जलाने के लिए पर्याप्त शारीरिक मेहनत नहीं करते तो अतिरिक्त वसा लीवर में जमा होने लगती है। इसी स्थिति को फैटी लीवर कहा जाता है। चिकित्सा विज्ञान में इसे ग्रेड एक, दो और तीन में विभाजित किया गया है।
शुरुआती चरणों में बीमारी के लक्षण स्पष्ट नहीं होते लेकिन स्थिति बिगड़ने पर शरीर में लगातार थकान और सुस्ती बनी रहती है। पेट के दाहिने हिस्से में दर्द होता है अचानक वजन या मोटापा बढ़ना भी लक्षण है। कई मामलों में थायराइड, शुगर और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।
जंक फूड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थ नुकसानदायक
जंक फूड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का चलन बढ़ने से होटलों में तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे वह हानिकारक ट्रांस फैट में बदल जाता है। यह वसा न केवल लीवर को नुकसान पहुंचाती है बल्कि खून की नलियों में जमा होकर हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ा देती है। यदि स्थिति ग्रेड तीन तक पहुंच जाए तो नियमित डॉक्टरी जांच और दवाइयों से इलाज संभव है।
संतुलित जीवनशैली अपनाएं
डॉ. सुदेश रैना ने बीमारी से बचने के लिए संतुलित जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया है। मैदा और तले हुए भोजन की जगह बाजरा, रागी, ज्वार जैसे मोटे अनाज और मौसमी फल-सब्जियों को प्राथमिकता दें। अतिरिक्त वसा को खत्म करने के लिए प्रतिदिन कम से कम 45 मिनट व्यायाम या शारीरिक गतिविधि अनिवार्य है। समय-समय पर लीवर फंक्शन टेस्ट करवाएं।