फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कृत्रिम अंगों से सपनों की उड़ान भर रही किश्तवाड़ की शीतल

विज्ञापन
विज्ञापन
किश्तवाड़। बिना हाथों के जन्मी एक बच्ची ने पैर की उंगलियों से अपनी तकदीर लिखने का हौसला दिखाया। किश्तवाड़ जिले के मुगल मैदान ब्लॉक में लाईधार गांव की 15 वर्षीय शीतल ने दसवीं की परीक्षा में पैर की उंगलियों से उत्तर पुस्तिका पर जवाब लिखे। फोकोमेलिया (जन्मजात बाजू या टांगें न होना) की चुनौती का सामना कर शीतल ने हौसला नहीं छोड़ा। उसकी आगे बढ़ने की ललक देखकर सेना ने उसे कृत्रिम हाथ (भुजाएं) दिलाए हैं। अब शीतल ऊंची उड़ान भरने की तैयारी में है।
विज्ञापन

पहाड़ों की कठिन जीवनशैली से धैर्य और मजबूत संकल्प की सीख लेकर शीतल शिक्षक बनना चाहती है। कृत्रिम अंग मिलने के बाद अब वह पैरालंपिक में तीरंदाजी का लक्ष्य लेकर चल रही है। वह इस क्षेत्र के युवाओं के लिए रोल मॉडल बन चुकी है। सैन्य अधिकारियों के अनुसार पैरालंपिक तीरंदाजी के राष्ट्रीय कोच ने शीतल की फिटनेस का मूल्यांकन कर तीरंदाजी का प्रशिक्षण देने का फैसला किया है। कोच कुलदीप बैदवान को विश्वास है कि शीतल भविष्य में देश के पदक जीतेगी। शीतल अब बेंगलुरू स्थित सामाजिक कार्यकर्ता मेघना गिरीश और एक एनजीओ की मदद से राष्ट्रीय तीरंदाजी कोच से प्रशिक्षण के लिए आगे बढे़गी। उसके माता-पिता ने कहा कि शीतल नए कृत्रिम अंगों से लिखने का प्रयास कर रही है। थोड़ा लिखने भी लगी है।
---
सेना ने देखी प्रतिभा, शिक्षा में कर रही मदद
वर्ष 2019 में मुगल मैदान में युवाओं के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में सेना ने शीतल की प्रतिभा को पहचाना और उसे शिक्षित करने का निर्णय लिया। मई 2021 में बेंगलुरू निवासी और नगरोटा शहीद मेजर अक्षय गिरीश की मां मेघना गिरीश मदद के लिए आगे आईं। प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने मामले का विश्लेषण कर शीतल के कृत्रिम अंगों के इलाज के लिए अपनी एनजीओ के माध्यम से वित्तीय मदद की। आत्म विश्वास से भरपूर अपनी नई भुजाओं के साथ एक शिक्षक बनने के लिए शीतल का संकल्प और भी मजबूत हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें