किश्तवाड़, पाडर। जम्मू-कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी की गुरु–शिष्य परंपरा योजना के अंतर्गत पाडर की पारंपरिक घुरी लोक कला का औपचारिक शुभारंभ पाडरी लोक कला मंच पाडर के परिसर में किया गया।
योजना के अंतर्गत एक सहायक एवं आठ शिष्यों का चयन किया गया, जिन्हें घुरी लोक कला से संबंधित पारंपरिक गीतों, नृत्य एवं प्रस्तुति विधाओं का विधिवत प्रशिक्षण दिया जाएगा। घुरी लोक कला पाडर क्षेत्र की एक प्राचीन एवं लुप्तप्राय सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती है।
कार्यक्रम का उद्घाटन डीडीसी सदस्य हरि कृष्ण चौहान ने किया। इस अवसर पर पाडरी लोक कला मंच के अध्यक्ष शादी लाल चौहान तथा घुरी लोक कला के प्रशिक्षण के लिए चयनित गुरु सलोचना देवी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
इस अवसर पर अपने संबोधन में हरि कृष्ण चौहान ने दूरदराज़ क्षेत्रों की विलुप्त होती लोक कलाओं के संरक्षण के लिए प्रयासों की सराहना की तथा सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने में गुरु–शिष्य परंपरा की महत्ता पर बल दिया।