उधमपुर। शहर को बेहतर सीवरेज व्यवस्था देने के उद्देश्य से देविका परियोजना के तहत तैयार किया गया सीवरेज सिस्टम अब खुद ही गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। 123 किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइन, 9 इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस), 3 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और करीब 11 हजार घरों को कनेक्शन देने के बावजूद शहर में सीवरेज लीकेज, ब्लॉकेज और मैनहोल ओवरफ्लो की समस्या बनी हुई है। व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए जरूरी संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी समय पर सुनिश्चित नहीं हो पाने से परियोजना का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। हालात यह हैं कि अधिकांश आईपीएस और एसटीपी बंद पड़े हैं जबकि नई कंपनी की नियुक्ति के लिए जारी टेंडर पर अब तक किसी ठेकेदार या कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई है। विभाग के अनुसार, परियोजना का काम पूरा करने वाली कंपनी को ही दस साल तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी थी, लेकिन जिम्मेदारी नहीं निभाने पर उसे बाहर कर दिया गया। अब नई कंपनी की तलाश में यूईईडी विभाग के बार-बार टेंडर जारी करने के बावजूद कोई ठेकेदार आगे नहीं आया है और विभाग को तीसरी बार टेंडर की तारीख बढ़ानी पड़ी है।
तीन एसटीपी में से दो बंद, उपचार व्यवस्था प्रभावित
संचालन और रखरखाव में लगातार देरी से जहां शहरवासियों की परेशानी बढ़ रही है, वहीं विभाग के सामने भी सीवरेज व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। जानकारी के मुताबिक तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में से केवल एक चालू है, जबकि दो बंद पड़े हैं। इसके अलावा सभी आईपीएस भी ठप हैं। लीकेज, ब्लॉकेज और मैनहोल ओवरफ्लो जैसी समस्याओं को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन पूरी व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अब भी नई कंपनी की नियुक्ति का इंतजार है। विभाग के अनुसार, एकमात्र चालू एसटीपी में करीब 70 प्रतिशत पानी ग्रैविटी के माध्यम से पहुंचता है, इसलिए इसके संचालन के लिए आईपीएस पर निर्भरता जरूरी नहीं है। बाकी दो एसटीपी को कार्यात्मक बनाने पर विभाग विशेष ध्यान दे रहा है। हालांकि नई कंपनी की नियुक्ति में देरी से व्यवस्था को पूरी तरह बहाल करने की चुनौती बनी हुई है।
2024 में पूरा हुआ था काम, 11 हजार से अधिक घर जुड़े
देविका परियोजना के तहत वर्ष 2024 में उधमपुर शहर में सीवरेज सिस्टम तैयार करने का काम पूरा किया गया था। इसके तहत 123 किलोमीटर सीवरेज लाइन बिछाई गई और 9 आईपीएस, एक एमपीएस तथा 3 एसटीपी तैयार किए गए। इसके अलावा 11 हजार से अधिक घरों को सीवरेज कनेक्शन दिए गए जबकि करीब 150 कनेक्शन अभी दिए जाने बाकी हैं। करार के मुताबिक काम पूरा करने वाली बीजीसी कंपनी को अगले दस वर्षों तक सिस्टम का संचालन और रखरखाव करना था लेकिन रखरखाव की जिम्मेदारी निभाने को लेकर पैदा हुई स्थिति के बाद अब विभाग नई कंपनी नियुक्त करने के लिए टेंडर प्रक्रिया में जुटा है।
टेंडर में कोई भागीदारी नहीं, तीसरी बार बढ़ानी पड़ी तारीख
सीवरेज सिस्टम के संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम) के लिए यूईईडी विभाग ने नए सिरे से टेंडर जारी किए हैं, लेकिन अब तक किसी कंपनी या ठेकेदार ने भागीदारी नहीं की है। इसी कारण तीसरी बार टेंडर की तारीख बढ़ानी पड़ी है। विभाग के अनुसार, बीजीसी कंपनी ने स्टे ऑर्डर के माध्यम से भी प्रक्रिया में बाधा डालने का प्रयास किया। विभाग अब मामले को सुलझाकर नई कंपनी की नियुक्ति और व्यवस्था को सुचारु बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
लीकेज और ओवरफ्लो दूर करने के लिए जम्मू से बुलाई पार्टी
नई कंपनी की नियुक्ति में देरी के बीच सीवरेज लीकेज, ब्लॉकेज और मैनहोल ओवरफ्लो की समस्याओं को दूर करने के लिए विभाग ने कुछ दिन पहले जम्मू से एक पार्टी बुलाई है। विभाग के मुताबिक, उसकी सहायता से इन समस्याओं को दूर करने का काम किया जा रहा है। हालांकि, तात्कालिक मरम्मत के साथ बंद पड़े एसटीपी को चालू करना और पूरे नेटवर्क का नियमित संचालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। जब तक नई कंपनी नियुक्त नहीं होती और तीनों एसटीपी कार्यात्मक नहीं बनते, तब तक शहरवासियों को सीवरेज संबंधी समस्याओं से स्थायी राहत मिलने की राह मुश्किल बनी रहेगी।
कोट
शहर में तैयार सीवरेज सिस्टम के संचालन और रखरखाव के लिए टेंडर जारी किए गए हैं लेकिन अभी तक कोई ठेकेदार आगे नहीं आया है इसलिए विभाग को तीसरी बार टेंडर की तारीख बढ़ानी पड़ी है। हालांकि शहर में सीवरेज लीकेज और ओवरफ्लो जैसी समस्याओं से निपटने के लिए 15-20 दिन पहले जम्मू से एक पार्टी को लाया गया है और उसने अपना काम भी शुरू कर दिया है, बाकी पूरे सीवरेज सिस्टम के संचालन और रखरखाव का काम ठेकेदार के माध्यम से ही संभव है और इसके लिए प्रयास लगातार जारी है। उम्मीद है जल्द ही शहर की सीवरेज व्यवस्था का सही से संचालन और रखरखाव का काम शुरू हो जाएगा।
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राजेश काचरू, एक्सईएन, युईईडी, उधमपुर