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Udhampur News: गोकुल गोदाम की महिलाओं के गोबर से बने दीयों से जगमग होगी दिवाली

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गोबर के दीपक और अन्य उत्पाद तैयार करती महिलाएं - फोटो : reasi news
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उधमपुर। उधमपुर की पंचायत सीन ब्राह्मणा के काॅह-फलॉटा की महिलाएं इस बार भी गोबर के दीयों और अन्य उत्पादों को लेकर पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने में अपनी सहभागिता को लेकर पूरी तरह से तैयार हैं। इन महिलाओं द्वारा गोबर से बनाए गए पर्यावरण अनुकूल दीपक न केवल घरों को रोशन करेंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएंगे।
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उधमपुर में श्री गोकुल गोदाम के नाम से शुरू किए गए इस घरेलू उद्योग की शुरूआत स्थानीय निवासी अर्चना देवी ने वर्ष 2023 में की थी। कुछ महिलाओं ने मिलकर गोबर से दीपक और अन्य सजावटी उत्पाद बनाना शुरू किया। देखते ही देखते यह छोटा सा प्रयास आज बड़े स्तर का रोजगार का माध्यम बन चुका है। गांव की 120 से अधिक महिलाएं आज इस कार्य से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर हैं। दीयों के अलावा गाय के गोबर से बनी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की खरीदारी का खासा क्रेज है और हवन सामग्री, धूपबत्ती भी उपलब्ध हैं।
अर्चना देवी कहती हैं कि इस उद्योग के पीछे उनके पति मनोहर लाल का अहम रोल है, जो सरकारी मुलाजिम है और गोसेवा समिति से जुड़े हुए हैं। उन्होंने ही पंचगव्य से धार्मिक कार्यों और हिंदू पर्वाें पर इस्तेमाल के लिए केमिकल फ्री देसी उत्पाद तैयार करने का आइडिया दिया था। उन्होंने उत्तराखंड में जाकर प्रशिक्षण हासिल किया और घर आकर पत्नी को इस काम के लिए ट्रेंड किया। फिर पत्नी अर्चना ने अपने आसपास के घरों की महिलाओं को भी अपने इस काम में साथ जोडा और पहली बार बीते साल 2023 के सिंतबर माह से दीपावली पर्व के लिए खासतौर पर गोबर से दीये बनाने का काम शुरू किया।
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पहली बार बेचे 20 हजार दीये, अब हर साल बढ़ रही मांग
अर्चना देवी के मुताबिक पहली बार मार्किट में दीयों को खास तवज्जों नहीं मिली लेकिन जैसे-जैसे दुकानदारों के माध्यम से लोगों को इनके बारें में जानकारी मिलती गई तो डिमांड भी बढ़ने लगी। पहली बार में ही उन्होंने दीवापली पर 20, हजार से अधिक दीयों की बिक्री कर अच्छा खासा मुनाफा कमा लिया। इससे प्रोत्साहन मिला तो पंचगव्य के इस्तेमाल से धूप, हवन सामग्री आदि धार्मिक कार्याें में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के निर्माण का कार्य भी शुरू कर दिया। अब हर साल अच्छी खासी बिक्री हो रही है और काफी संख्या में और भी महिलाएं हमसे जुड़कर इस काम का प्रशिक्षण लेकर अपना स्वरोजगार कर रहीं हैं।

जलने के बाद नहीं फैलाते प्रदूषण
इन दीपकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये पूरी तरह प्राकृतिक हैं। गोबर और राख के मिश्रण से तैयार ये दीपक न केवल टिकाऊ हैं, बल्कि जलने के बाद भी प्रदूषण नहीं फैलाते और सुगंध भी देते हैं। साथ ही इन दीपकों की कीमत अन्य बाजारू दीपकों की तुलना में काफी कम है। केवल 3 से 8 रुपये प्रति दीपक दाम है। यही वजह है कि इनकी मांग न केवल उधमपुर बल्कि आसपास के अन्य शहरों तक भी पहुंच चुकी है।
‘वेस्ट टू बेस्ट’ की मिसाल
वहीं मनोहर लाल ने बताया कि गोबर से बने इन दीपकों के साथ धूपबत्ती, सजावटी मूर्तियां, छोटे पौधों के गमले और प्राकृतिक खाद जैसे अन्य उत्पाद भी तैयार किए गए हैं। इन सबकी बिक्री से महिलाओं को वर्षभर रोजगार मिलता है। इस पहल से न केवल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सशक्तीकरण मिला है, बल्कि स्थानीय युवाओं को भी प्रेरणा मिल रही है। ग्राम प्रधान के अनुसार, इस कार्य ने गांव में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया है। “जहां पहले गोबर बेकार समझा जाता था, वहीं अब यही हमारी आय का साधन बन गया है। यह पूरी तरह ‘वेस्ट टू बेस्ट’ की मिसाल हैं।
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