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Udhampur News: मिडिल स्कूल शक्ति नगर की हालत खस्ता, भय में पढ़ रहे बच्चे

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स्कूल की एक कक्षा की जर्जर हालत। - फोटो : uhdampur news
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उधमपुर। सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल इमारतें और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी न सिर्फ शिक्षा पर प्रभाव डाल रही है, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन के लिए भी बड़ा खतरा है।
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ऐसा ही एक स्कूल शहर के वार्ड 7 का सरकारी मिडिल स्कूल शक्ति नगर है। लगभग 56 साल पुराने इस स्कूल की हालत वर्तमान में इतनी अधिक बदहाल है कि इसमें कक्षाओं का संचालन शिक्षकों के लिए भी भारी परेशानी का सबब बन चुका है। बच्चे भय के आलम में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
बहरहाल को-एजूकेशन वाले इस स्कूल में छात्रों की संख्या अभी भी 133 है, जो अन्य स्कूलों के मुकाबले काफी अधिक है और इन्हें पढ़ाने के लिए स्कूल में 9 शिक्षक तैनात हैं।
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वहीं स्कूल की बदहाली का आलम यह है कि इसके कक्षा रूम से लेकर चारदीवारी तक की हालत काफी ज्यादा जर्जर हो चुकी है, जो कभी भी टूट कर गिर सकती है। कमरों में खिड़कियां क्षतिग्रस्त हैं और दीवारों से लेकर छत तक में दरारें आ गईं हैं जिसके कारण बारिश होने पर क्लासों में पानी भर जाता है। खेल कूद के लिए खेल मैदान की भी उचित सुविधा नहीं हैं। मजबूरी में कुछ कक्षाएं बाहर आंगन में लगती हैं, यह अव्यवस्था बीते लगभग 7 साल से बनी हुई है। इससे शिक्षक भी हादसे के डर से परेशान हैं।
उनका कहना है कि स्कूल की सात कक्षाओं में से दो की हालत इतनी अधिक खराब है कि हादसे के डर से इसमें कक्षाओं का संचालन बंद कर दिया गया है। अन्य दो की हालत भी कक्षाओं के संचालन के लायक नहीं हैं। शेष बचे दो छोटे और एक अन्य कमरे में ही स्कूल की अधिकतर कक्षाओं का संचालन होता है और कक्षा रूम की कमी के कारण कुछ कक्षाएं बाहर आंगन में लगानी पड़ती है।
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इमारत के मामले में हमारा स्कूल काफी भयावह हालत में हैं और इसकी चारदिवारी से लेकर इमारत तक गिरने का डर बना हुआ है। इस डर के कारण कक्षा रूम के अंदर भी मन अशांत रहता है और पढ़ाई में ठीक से ध्यान नहीं लग पाता है। जल्द समाधान की जरूरत है।
-सोनाक्षी, छात्रा

स्कूल में कमरों की हालत काफी ज्यादा जर्जर है। खिड़कियां टूट चुकी हैं और छत और दीवारों पर दरारें पड़ गईं हैं। बारिश के दौरान छत से भी पानी टपकता है। डेस्क सरका-सरका कर काम चलता है लेकिन फिर भी कई बार किताबें तक गीली हो जाती हैं। जो चिंताजनक है।
-सुरभि, छात्रा


स्कूल में खेल मैदान की भी सुविधा नहीं हैं। बारिश होने पर आंगन में भी पानी भर जाता है और कीचड़ फिसलन बढ़ जाने से वर्दी और बैग तक गंदे हो जाते हैं। कई बार नई इमारत की मांग को लेकर प्रदर्शन भी कर चुके हैं लेकिन इसके बावजूद स्कूल की हालत में सुधार नहीं हुआ है।
-अरुण, छात्र

स्कूल की बदहाली के कारण परिवार वाले दूसरे स्कूल में जाने को भी कहते हैं लेकिन शिक्षकों का सरल व्यवहार और उनके मेहनत के साथ पढ़ाने का बढि़या तौर तरीका जाने की अनुमति नहीं देता है। स्कूल की हालत सुधर जाए तो बेहतर है।
-तरूण, छात्र
स्कूल की जमीन के विवाद के कारण बीते कई सालों से स्कूल की हालत दयनीय बनी हुई है जो मरम्मत और निर्माण कार्य नहीं हो पाने के कारण लगातार बिगड़ती जा रही है। इसमें हादसे का भी डर बना रहता है। बारिश में कक्षा रूम के भीतर भी छत से पानी टपकता है और टूटी खिड़कियों से भी पानी अदंर पहुंचकर भर जाता है। इससे काफी समस्या पेश आ आती है। इसके कारण अभी कुछ समय पहले दो कमरों को पूरी तरह असुरक्षित घोषित किए जाने के कारण कक्षाओं का संचालन बंद करना पड़ा है। शेष कमरों की हालत भी खस्ता हो चुकी है।
-द्वितीय प्रभारी, रचना

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स्कूल की जमीन को लेकर काफी समय से चल रहे विवाद के कारण अब तक स्कूल का विकास नहीं हो सका है इसलिए जब तक जमीन का सीमांकन नहीं होता तब तक कोई भी निर्माण संभव नहीं हैं।
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-डिप्टी सीईओ, कल्पना जसरोटिया
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