उधमपुर। प्रधान सत्र न्यायाधीश की अदालत में सुनवाई के लिए दायर एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में मोहम्मद हनीफ ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें उन्हें अपनी पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया था।
अदालत ने दस्तावेज में मामले के तथ्य, आदेश को चुनौती देने के आधार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की संबंधित धाराएं, दोनों पक्षों की दलीलें और अदालत के फैसले पर घोर करते हुए भरण-पोषण के मूल आदेश को बरकरार रखते हुए पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया।
तथ्यों पर न्यायालय के अवलोकन में मोहम्मद हनीफ और हलीमा अख्तर का विवाह 2012 में संपन्न हुआ था। उनके तीन बेटे हैं। विवाद 2020 में पैदा हुआ। न्यायालय को आदेश में कोई क्षेत्राधिकार संबंधी त्रुटि, क्षेत्राधिकार का दुरुपयोग या दोष नहीं मिला। जिसके चलते पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई। उधमपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें उन्हें अपनी पत्नी और बच्चों को गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।