पांच माह की मासूम सलौनी के टूटे पैर के बदले सही पैर पर प्लास्टर कर देने के मामले की जांच के लिए जिला अस्पताल प्रशासन ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। कमेटी मामले की जांच कर रिपोर्ट अस्पताल प्रशासन को सौंपेगी।
उसके बाद दोषी पाए जाने वाले डॉक्टर या अन्य चिकित्सा कर्मी पर कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि शनिवार को पांच माह की बच्ची का दायां पैर टूट गया था, लेकिन एक्स-रे मौजूद होने के बावजूद उसके बाएं पैर पर प्लास्टर कर दिया।
बच्ची के लगातार तड़पते रहने जब रविवार को उसकी दोबारा जांच की गई तो पता चला कि उसके ठीक पैर पर ही प्लास्टर कर दिया गया। सलौनी के घरवालों के विरोध करने के बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी गलती मान ली।
बच्ची का दोबारा टूटे पैर का प्लास्टर किया गया। घरवालों को इस मामले पर उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया। सोमवार को सलौनी के केस में हुई भारी चूक के सच को सामने लाने के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया।
कमेटी में अस्पताल के एक फिजिशियन, एक सर्जन और एक सुपरवाइजर शामिल हैं। अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट नरेंद्र भतयाल ने कहा कि कमेटी जल्द जांच कर अपनी रिपोर्ट उन्हें सौंपेगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सलौनी की देखभाल अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी है।