उधमपुर। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और स्थानीय बाजारों में बढ़ती मांग के कारण रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल आया है। कच्चे तेल और प्लास्टिक की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ कारखानों से सीमित सप्लाई ने आम जनता विशेषकर मध्यम वर्गीय परिवारों की कमर तोड़ दी है। इससे रसोई का बजट बिगड़ गया है।
व्यापारियों के अनुसार अमेरिका-इस्त्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर थोक बाजारों पर दिख रहा है। कच्चे तेल और प्लास्टिक के महंगे होने से खाद्य तेल की बोतलों और अन्य पैक किए गए सामान की लागत बढ़ गई है। कारखानों से आने वाला माल सीमित कर दिया गया है जिससे थोक विक्रेताओं तक सामान ऊंचे दाम पर पहुंच रहा है।
पिछले 15 से 20 दिन के भीतर खाद्य तेल की कीमतों में 10 से 12 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चावल की कीमतें पहले ही आसमान छू रही थीं, अब तेल महंगा होने से जायका बिगड़ गया है। इसी बीच नवरात्र के चलते घी और पूजा के तेल की मांग बढ़ने से बाजार में किल्लत और कीमतें दोनों बढ़ गई हैं। इससे पहले रसोई गैस की किल्लत और बढ़ती कीमत से लोग परेशान थे।
जनता पर दोहरी मार
स्थानीय ग्राहकों का कहना है कि यह समय बच्चों के स्कूल दाखिले, नई किताबें और वर्दी खरीदने का है। एक तरफ शिक्षा का खर्च और दूसरी तरफ रसोई गैस व खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतें घर चलाना मुश्किल बना रही हैं। बाजार में यह चर्चा भी गर्म है कि कुछ थोक विक्रेताओं ने भविष्य में अधिक मुनाफे की उम्मीद में सप्लाई को जानबूझकर सीमित कर दिया है ताकि वे पुराने स्टॉक को ऊंचे दामों पर बेच सकें।
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पीछे से माल कम आ रहा है और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण प्लास्टिक महंगा हो गया है जिससे पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ गई है।
- जितेंद्र बरमानी, अध्यक्ष, व्यापार मंडल
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नवरात्र के चलते तेल की मांग बढ़ी है लेकिन आपूर्ति कम है। बाहरी देशों के हालात का असर कीमतों पर साफ दिख रहा है।
-अशोक कुमार, स्थानीय दुकानदार
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सामान पीछे से महंगा आ रहा है। कीमत को लेकर ग्राहकों को समझाना मुश्किल हो रहा है क्योंकि हमें भी अपना घर चलाना है।
-सूरज चौधरी, स्थानीय दुकानदार