शहर के चौक-चौराहों, सड़कों व गलियों पर सुबह से शाम तक लगे गंदगी से ढेर
स्थायी कर्मचारी बनाने और एनपीसी को रद्द कर पुरानी पेंशन योजना बहाल करने के अलावा कई मांगें उठाई
संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। स्थायी कर्मचारी बनाने और एनपीसी को रद्द कर पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने सहित कई लंबित मांगों को लेकर नगर परिषद सफाई कर्मचारियों ने रविवार को कामछोड़ हड़ताल शुरू कर दी। पहले दिन शहर के 21 वार्डों से 45 टन कचरा नहीं उठा। इससे शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है।
वहीं, हड़ताल के कारण रविवार को भैया दूज का त्योहार होने के बावजूद शहर में साफ-सफाई का काम नहीं किया गया। शहर के सभी चौक-चौराहों, सड़कों व गलियों पर सुबह से लेकर शाम तक कचरे और गंदगी से ढेर लगे रहे। दिन भर किसी भी कर्मचारी ने काम नहीं किया।
हड़ताल के शुरू होने के बाद से ही शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है। गंदगी नहीं उठाए जाने के कारण शहर के विभिन्न हिस्सों में कचरे के बड़े ढेर लग गए हैं। गंदगी के ढेरों से उठने वाली असहनीय दुर्गंध के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डंपिंग स्टेशन से गंदगी नहीं उठाए जाने के कारण यहां शाम तक कई टन गंदगी जमा हो चुकी है। सलाथिया चौक, धार रोड, रामनगर चौक, सैलां तालाब मेटाडोर स्टैंड व अन्य कई स्थानों पर जमा गंदगी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
घर-घर से गंदगी उठाने वाले निजी कर्मचारी काम कर रहे हैं। यह लोग घरों से गंदगी को लेकर सुई इलाके में जमा कर रहे हैं। मगर इससे ज्यादा राहत नहीं मिल रही है। शहर के बाजार की भी हालत खराब है। शहरवासियों का कहना है कि जब भी सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल की है, इसके गंभीर परिणाम शहरवासियों को ही भुगतने पड़े हैं। अगर यह हड़ताल ज्यादा दिन बढ़ जाएगी तो रास्ते से गुजरना मुश्किल हो जाएगा।
इसको लेकर सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से मांगों को लेकर प्रदर्शन करते आए हैं। मगर हर बार सरकार व विभाग उनको मात्र आश्वासन देकर टालता आया है। इससे समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
अर्बन लोकल बाडी उधमपुर के जिला अध्यक्ष डेविड संधू ने बताया कि सात साल से अधिक का सेवाकाल पूरा कर चुके डेलीवेजरों को पक्का किया जाने के अलावा एसआरओ 43 का लाभ देने, न्यू पेंशन योजना को रद्द कर ओल्ड पेंशन योजना को बहाल करने और नए कर्मचारियों की नियुक्ति करना उनकी चार प्रमुख मांगें हैं। यह सभी पूरी तरह से जायज हैं। सात साल के बाद अस्थायी कर्मचारी को स्थायी कर्मचारी बना दिया जाता है, लेकिन उनके पास जम्मू संभाग में ही 650 कर्मचारी 15-15 साल का सेवाकाल पूरा करने के बाद स्थायी नहीं किए गए हैं।
60 कर्मचारी देख रहे स्थायी होने की राह
उधमपुर में 60 कर्मचारी स्थायी होने की राह देख रहे हैं। इसके अलावा पुराने कर्मचारियों की सेवानिवृति के बाद नए कर्मचारी भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। उधमपुर में मात्र 75 स्थायी कर्मचारी 21 वार्डों में सफाई का जिम्मा संभाल रहे हैं। यहां हर दिन लगभग 45 टन कूड़ा हर रोज निकलता है। ऐसे में यहां जरूरत 300 के करीब कर्मचारियों की है। वहीं, इसके चलते वर्तमान में काम कर रहे कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इससे सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। इसलिए नए कर्मचारी लगाए जाना भी बेहद जरूरी है। नई पेंशन योजना कर्मचारियों के हित में नहीं हैं, इसलिए उनकी मांग है कि पुरानी पेंशन योजना को ही बहाल किया जाना चाहिए। एसआरओ 43 का लाभ भी दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अपनी इन लंबित मांगों को लेकर वे बीते कई सालों से धरना-प्रदर्शन और काम छोड़ हड़ताल भी करते आ रहे हैं। मगर सरकार सिर्फ आश्वासन देकर उनको हर बार टाल रही है। इस साल की शरुआत में भी उन्होंने तीन काम छोड़ हड़ताल की थी, जिसे प्रशासन ने आश्वासन देकर खत्म करवा दिया था। अब साल खत्म होने को है, लेकिन अभी तक मांगों को पूरा करने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है। इसलिए अब उन्हें फिर से मजबूर होकर काम छोड़ हड़ताल शुरू करने पर मजबूर होना पड़ा है। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती है तब तक वे अपनी इस हड़ताल को खत्म नहीं करेंगे।