उधमपुर। बरसात और चुनाव के चलते नगर परिषद की ओर से देविका और शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर तैयार की गई कई परियोजनाओं का काम अधर में लटका हुआ था लेकिन अब जल्द ही शहर में स्वच्छता से जुड़े विकास कार्य रफ्तार पकड़ेंगे।
आठ अक्तूबर को मतगणना के बाद देविका नदी की निगरानी से लेकर कूड़ा निस्तारण से जुड़ी समस्याओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लिए विभाग ने अक्तूबर के अंत तक का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। शहर के 21 वार्डों से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण की समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। इसके लिए विभाग और प्रशासन की ओर से कुछ साल पहले मांड में ठोस कूड़ा प्रबंधन परियोजना के लिए लगभग 95 कनाल भूमि का चयन किया गया लेकिन किन्हीं कारणों की वजह से परियोजना सिरे नहीं चढ़ पाई। हां चयनित की गई भूमि का कचरा डंप करने के लिए इस्तेमाल जरूर किया जाने लगा है लेकिन जैसे-जैसे कचरे का अंबार बढ़ने लगा। मांड में रहने वाले आसपास के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जनता विरोध पर उतरी आई। इसके बाद नगर परिषद ने वहां कचरा फेंकना बंद कर दिया। इस दौरान मांड में जमा हुए सैकड़ों टन कूड़े के भंडार के निस्तारण को लेकर भी विभाग की ओर से जैव उपचार की योजना तैयार की गई। इसको लेकर टेंडर भी जारी कर दिया गया है। योजना के तहत मांड में फैली गंदगी का मौके पर जैविक रूप से निस्तारण किया जाएगा और ठोस कचरे को रिसाइकिलिंग के लिए भेज दिया जाएगा। इससे गीले कूड़े से पैदा हुई खाद का वहीं पर फूल आदि के बगीचे के रूप में सौंदर्यीकरण के रूप में इस्तेमाल कर भूमि को लोगों की सहूलियत के लिए तैयार किया जाएगा।
सूई में तैयार होगी ठोस कूड़ा प्रबंधन परियोजना
वहीं शहर में जमा होने वाले कचरे के निस्तारण के लिए शहर के साथ लगते सुई इलाके में ठोस कूड़ा प्रबंधन के लिए जगह का चयन कर लिया गया है। पहले सुई में पांच टन की क्षमता की यूनिट चलाई जा रही थी, जबकि शहर से रोजाना निकलने वाले लगभग 20 टन कचरे का नियमित रूप से निस्तारण नहीं हो पा रहा था। इसकी वजह से बाकी का कचरा मांड में फेंकना पड़ रहा था लेकिन सुई में तैयार की जा रही परियोजना के तहत क्षमता को बढ़ाने के साथ ही रोजाना जमा होने वाले कचरे से ठोस कूड़ा अलग कर रिसाइकिलिंग के लिए भेजा जाएगा और गीले कूड़े का जैविक पद्धति से मौके पर ही निस्तारण कर दिया जाएगा। इससे न गंदगी के ढेर जमा होंगे और न हीं क्षेत्र के लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
देविका में गंदगी फैलाने पर होगी कार्रवाई
दूसरी ओर उधमपुर में देविका नदी की स्वच्छता का अहम मुद्दा रहा है। इसको लेकर केंद्र की ओर से सीवरेज परियोजना का भी निर्माण किया गया। इससे शहर से निकलने वाली मलमूत्र की गंदगी को देविका से अलग कर सीवरेज के माध्यम से ट्रीट किया जा रहा है लेकिन फिर भी देविका में लोगों की ओर से कचरा और गंदगी डालकर देविका को दूषित किया जा रहा है। इसको लेकर भी विभाग की ओर से परियोजना तैयार की गई है। इसके तहत देविका नदी, तट और घाट के आसपास 22 के करीब सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके लिए एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया जाएगा। नगर परिषद सहित डीसी कार्यालय परिसर से भी इसकी निगरानी रखी जाएगी। देविका नदी या उसके आसपास कोई भी व्यक्ति विशेष या व्यापारिक प्रतिष्ठान गंदगी फैलाता नजर आया तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी और प्रदूषण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
सभी प्रक्रियाएं हो चुकी पूरी
इस बारे में नगर परिषद के सीईओ विशाल सडोत्रा ने बताया कि सभी परियोजनाओं को लेकर प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं। आचार संहिता के चलते परियोजनाओं की औपचारिक शुरुआत नहीं हो पाई थी। एमसीसी के संपन्न होते ही इन परियोजनाओं पर युद्ध स्तर काम शुरू कर दिया जाएगा ताकि अक्तूबर के अंत तक सभी को पूरा किया जा सके।
परियोजनाओं के नाम:
1. बायो रेमिडिएशन ऑफ मांड
2. साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट सुई
3. सीसीटीवी कैमरों की इंस्टालेशन व कंट्रोल यूनिट
4. उधमपुर टाउन के लिए आईईसी गतिविधियां
फोटो सहित