कुद में इसी बंगले में रूके थे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी:- संवाद
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चिनैनी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी देश की आजादी से कुछ दिन पहले चिनैनी तहसील के कुद में एक बंगले में ठहरे थे। गांधी जी अपने साथ बकरी और चरखा भी लेकर आए थे। उन्हें देखने के लिए लोगाें की भीड़ उमड़ पड़ी थी। यह कहना है 101 वर्षीय बुजुर्ग हंस राज का। हंसराज कहते हैं कि जब राष्ट्रपिता कुद आए थे, उस दौरान वे कुद में नहीं थे। लेकिन, उनके बड़े भाई गुरदास उन्हें बताते थे कि महात्मा गांधी ने कुद में सकेतर के पास एक बंगले में रात गुजारी थी। इस दौरान हर कोई राष्ट्रपिता को देखना व सुनना चाहता था। लोगों ने महात्मा गांधी का कुद में जोरदार स्वागत किया। गांधी के साथ एक बकरी और उनका चरखा भी था।
उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी के कुद में रुकने के बारे में आसपास के गांवों को भी जब पता चला तो वह भी कुद पहुंच गए थे। फिर दूसरे दिन गांधी अपनी कार में सवार होकर चिनैनी से होते हुए जम्मू चले गए थे। गौरतलब है कि पिछले दिनों चिनैनी आए पद्मश्री प्रो. शिवदत्त निर्मोही ने भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि 4 अगस्त 1947 को राष्ट्रपिता कुद रुके थे, और कुद की मिठाई का स्वाद चखा था। उसके बाद चिनैनी आए थे।