संवाद न्यूज एजेंसी
उधमपुर। केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर जिले में राजनीतिक, सामाजिक और बौद्धिक वर्गों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कांग्रेस ने बजट को जम्मू-कश्मीर की उपेक्षा करने वाला बताया। भाजपा, समाजवेसियों और बुद्धिजीवियों ने इसे विकास, आत्मनिर्भर भारत और समावेशी विकास की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम करार दिया है। बजट को लेकर बेरोजगारी, महंगाई, किसान, महिला सशक्तीकरण और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से चर्चा में रहे।
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष सुमित मगोत्रा
ने बजट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट केंद्र सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दावों को खोखला साबित करता है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण, लंबे प्रतिबंधों और राज्य का दर्जा छीने जाने के बाद जम्मू-कश्मीर गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी चिंताजनक स्तर पर है, लेकिन बजट में रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस रोडमैप नजर नहीं आता।
सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष शर्मा ने बजट का समर्थन करते हुए कहा कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों को बढ़ावा देना उद्योगों के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास से देश विकसित भारत की ओर अग्रसर होगा। यह बजट जनहितैषी और युवा हितैषी है, जिसमें महिला सशक्तिकरण, किसानों के कल्याण और रोजगार सृजन के प्रावधान शामिल हैं।
स्थानीय नेता पवन खजूरिया ने बजट को मिला-जुला बताते हुए कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग के लिए कुछ राहत, शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र को बढ़ावा देना सराहनीय है। उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारियों की दवाइयों के सस्ते होने से आम लोगों को राहत मिलेगी, लेकिन बढ़ती महंगाई, कृषि लागत, स्थायी रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं पर और ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
एडवोकेट सुहानी कटोच ने बजट 2026–27 को दूरदर्शी बताते हुए कहा कि यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला रोडमैप है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय, युवाओं के रोजगार, महिला सशक्तीकरण, डिजिटल इंडिया, स्टार्ट-अप, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में निवेश से देश को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में मदद मिलेगी।